योगस्य महत्वम्
योगस्य महत्वम् @मानव योग भारतवर्ष की अति प्राचीन विद्या है यह ऐसी आध्यात्मिक क्रिया है जो हमारे शरीर,मन एवं आत्मा को परिमार्जित करके हमें ईश्वर सँग जोड़ती है। चित्त में चलने वाली अनंत वृत्तियों, जन्म-जन्मांतर के मलिन सँस्कारों का निरोध ही योग है। (महर्षि पतंजलि) मन की नकारात्मक आसुरी वृत्तियाँ ही हमारे जीवन की उन्नति में सबसे बड़ी बाधक हैं। शरीर एव मन का गहरा संबंध है; मन का जैसा चिंतन होता है, शरीर भी उसी दिशा में अग्रसर होता है। शारीरिक एवं मानसिक क्षमताओं में वृद्धि का आधार योग ही है; योग क्रियाएं शरीर को परिपुष्टता प्रदान करती हैं। योग हमारे शरीर को नई आध्यात्मिक ऊर्जा से परिपूर्ण करता है; उसे समृद्ध करता है। जिसने अपने शरीर को योग रूपी अग्नि में तपा लिया है, उसके शरीर से रोग एवं अकाल मृत्यु भी दूर रहती है। वेद रूपी कल्पवृक्ष का फल योगशास्त्र है; इस योगशास्त्र के सेवन से सँसार के तीन तापों का भी शमन होता हैं। (गोरक्ष सँहिता) नियमित ...