राखी की डोर
राखी की डोर @मानव बारिश की बूँदों की रुनझुन के बीच आता है रक्षाबंधन! साधारण से राखी के धागे में भाई-बहन के प्रेम,विश्वास और भावनाओं की पूरी दुनिया समाई होती है। रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रति प्रेम,विश्वास और दायित्व का बंधन है; राखी का सूत्र होने से पहले, यह आत्माओं के बीच एक स्नेहसिक्त बंधन का पावन प्रतीक है। आधुनिकता की आँधी के बावजूद कम नहीं हुआ है भाई-बहन के बीच स्नेह! एक ऐसा रिश्ता जिसकी घनी छाँव में सदा बैठा होता है बचपन! समय बदलता है, दायित्व बढ़ते हैं, परिस्थितियां बदल जाती हैं, लेकिन बचपन का अपनत्व सदा रहता है। किसी रीति-रिवाज के कारण हमारे सँबंध नहीं, बल्कि एक-दूसरे को आवश्यक समय,ध्यान और ऊर्जा देने से प्रगाढ़ बनते हैं। इसलिए राखी केवल त्योहार नहीं, बल्कि पुरानी स्मृतियों को फिर से जी लेने का अवसर भी है। यहाँ रक्षा का अर्थ केवल शरीर की रक्षा ही नहीं, बल्कि एक-दूसरे के सम्मान, सपनों,आत्मविश्वास और गरिमा की रक्षा करना भी है। हमें केवल शरीर की नहीं, बल्कि एक-दूसरे के सम्मान, सपनों,आत्मविश्वास और गरिम...