समत्वं योगः उच्यते
अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पर, समत्वं योगः उच्यते @मानव यदि मन की हलचल और गतिविधियों को निश्चल कर लें तो योग की स्थिति आती है तब चेतना में सब कुछ एक हो जाता है यही 'चित्त वृत्ति निरोध' है। यह मानव को उस चीज से मुक्त करता है, जो वह खोज रहा है; वह चाहे उसके भीतर हो या बाहर; यह हर चीज से मुक्त करता है। पतंजलि का 'चित्त वृत्ति निरोध ' हमें हमारी मुक्ति या आत्म-ज्ञान की ओर ले जा सकती है। योग का अर्थ है जुड़ना, योग-शास्त्र के अनुसार योग एक विशेष प्रकार से सायास जुड़ने का नाम है। योग विद्या के आलोक में अंतर और बाह्य जगत के साथ हमारा रिश्ता नया ओजस्वी अर्थ प्राप्त कर लेता है। यम और नियम नैतिक जीवन जीने की प्रक्रिया बताते हैं तो आसन शरीर का रख-रखाव और उसकी क्षमता को सँवर्धित करने का काम करते हैं। प्राणायाम हमारे श्वास और प्राणिक ऊर्जा को व्यवस्थित करते हैं; प्रत्याहार बाह्य दुनिया के साथ विवेकपूर्ण संबंध को नियमित करता है। ध्यान, धारणा और समाधि अँतरंग योग हैं, जो चेतन...