रसालानां राजा भवति
रसालानां राजा भवति @मानव वैदिक काल से ही आम फलों का राजा है; आम का पेड़ वसंत ऋतु का प्रिय और सदा रमणीय होता है; यह सभी रसीले फलों का राजा माना जाता है। रूपेण सुभगो रम्यो वसन्तदूतप्रियः सदा। आम्रवृक्षो रसालानां राजा भवति सर्वदा।। भारत में आम सिर्फ एक फल नहीं अपितु धूप,मिट्टी की सुगंध, बचपन की दोपहरी और सँस्कृति का रस है। भारत में लोग जेठ की गर्मी और लू की तपिश इसी एक फल के सहारे सानन्द जी जाते हैं। यहाँ गर्मी की छुट्टियाँ यानी आम, हर किस्म का आम! कच्ची अमिया चुराकर आपस में बाँटकर नमक मिर्च से खाना। वो आम का अचार जो दादी नानी धूप में सुखाती थीं; वो आम का पना जो लू से बचने के लिए आदतन पिलाया जाता था, वो आमरस-पूरी की दावत जो पूरे कुनबे को जोड़ती थी। वह बगीचे के आम का पककर चूना! वह छत पर खटिया लगाकर बाल्टी में ठण्डे पानी में भरे आम और घर भर की चारों ओर जुटी चुहल कमेटी। आम के असली चाहने वाले आम और स्वाद के बीच किसी प्रकार का अवरोध नहीं चाहते; आम को धोया,दबाया और सीधे आम के रस के...