भगवान महावीर का संदेश
महावीर जयन्ती पर, भगवान महावीर का संदेश @मानव अहिंसा, सिद्धांत भगवान महावीर की एक गहन दार्शनिक चेतना है, जो बताता है कि हिंसा मात्र शारीरिक आघात नहीं, बल्कि हर वह स्थिति है जहाँ किसी के अस्तित्व,सम्मान या जीवन-निर्वाह पर प्रतिकूल प्रभाव पड़े। भगवान महावीर ने सँसार में बढ़ती हिंसा,अन्याय एवं अमानवीयता को शाँत करने की दिशा में सोचा। जब किन्हीं कारणों से जीवन-यापन कठिन होता है, तब यह एक प्रकार की 'संरचनात्मक हिंसा' का रूप है जिसमें नीतियाँ और व्यवस्थाएं इस प्रकार काम करती हैं कि वे समाज के एक वर्ग को निरंतर प्रभावित करती हैं। भले ही उसमें प्रत्यक्ष हिंसा न दिखे यह प्रभाव धीमा, किंतु गहरा होता है, जो समय के साथ असमानता और असँतोष को बढ़ाता है। महावीर का सँदेश सिखाता है कि अहिंसा निष्क्रियता नहीं, बल्कि सजग एवं साहसी हस्तक्षेप है; अन्याय के विरुद्ध आवाज उठाना और सँतुलन स्थापित करना ही सच्चा धर्म है। यह विचार केवल व्यक्तिगत आचरण तक सीमित न रहे, बल्कि नीतियों और शासन में भी दिखे, क्योंकि जब अन...