आत्मकल्याण पथ प्रदर्शक
स्वामी दयानंद जन्मजयंती आत्मकल्याण पथ प्रदर्शक @मानव वेदों की भाषा में मनुष्य का अँतिम लक्ष्य मोक्ष निर्धारित करने वाले स्वामी दयानंद जी ने वेदों की ओर लौटने के लिए लोगों का आह्वान किया। इसका अभिप्राय भारत की आध्यात्मिक परंपरा से जुड़ जाना है; ब्रह्मविद्या प्राप्ति के लिए स्वयं को प्रस्तुत करना है; क्योंकि ब्रह्म विद्या ही व्यक्ति को मोक्ष की ओर ले जाती है। अतः "उठो, जागो और तब तक रुको नहीं जब तक कि लक्ष्य की प्राप्ति न हो जाए।" "उत्तिष्ठत जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधयत" (कठोपनिषद) उनका श्रेय वाक्य रहा। ब्रह्म की रहस्य भरी विद्या के विवेचन से परिपूर्ण उपनिषदों के साथ तादात्म्य से हमें विवेक और वैराग्य की ओर ले जाती है। उपनिषद जीवन का वास्तविक रहस्य अपने आप को जानना है; जिसे जानकर ही अपने लक्ष्य की ओर गति करना है और जब तक लक्ष्य न प्राप्त हो, तब तक निरंतर आगे बढ़ते रहना है। यमराज ने नचिकेता को मनुष्य जीवन के दो मार्गों श्रेय और प्रेय मार्ग का बोध कराय...