विवेकी सन्त दृष्टि
तुलसी जयंती विवेकी सन्त दृष्टि @मानव 'गुन तुम्हार समुझइ निज दोसा' इसके अनुसार तुलसी भगवान के ऐसे भक्त हैं, जो संसार को पार उतारने वाला ग्रंथ 'श्रीरामचरितमानस' देते हैं। तुलसी की दृष्टि है कि 'कोई ऐसा गुण नहीं है, जो हमारे प्रभु श्रीरामचंद्र जी में न हो और कोई ऐसा दोष नहीं है, जो मुझ तुलसीदास में न हो।' श्रीरामचरितमानस का यही जीवन दर्शन है। सबको राममय मानकर प्रणाम करना और फिर सत को स्वीकार कर असत का त्याग करना ही तुलसी के मानस की दृष्टि है। इस दृष्टि ने श्रीरामचरित्र का ऐसा सेतु बनाया, जिस पर चढ़कर समर्थ और बड़े लोगों के साथ अत्यंत छोटी चींटी, जिसमें कोई सामर्थ्य है ही नहीं, वह भी पार जा सकती है; लोक और वेद के बीच यह सेतु बना है। ✍️मनोज श्रीवास्तव