नकारात्मकता का अँत
नवरात्र पर, नकारात्मकता का अँत @मानव एक ही परम तत्व की अभिव्यक्ति है सँसार! किंतु वह परम तत्व स्वयं को विभिन्न रूपों,ऊर्जाओं और गुणों के माध्यम से अभिव्यक्त करता है। नवरात्र का पर्व अपनी चेतना को पहचानने और भीतर छिपी शक्ति को जाग्रत करने का पर्व है। देवी के विभिन्न रूप हमारे भीतर छिपी ऊर्जा नकारात्मकता के अंत की ओर सँकेत करते हैं। जीवन शक्ति ही दिव्यता है और वह भीतर ही विद्यमान है। जब यह जाग्रत होती है तो नकारात्मकता का अंत स्वतः ही हो जाता है। नवरात्र केवल माँ दुर्गा की आराधना और गरबा डाँडिया का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर छिपी नकारात्मक शक्तियों पर विजय पाने का भी अवसर है। बुराइयाँ रक्तबीज की तरह हैं, वो आती हैं, हम उन्हें खत्म करते हैं और वो फिर आ जाती हैं। दुनिया की अधिकतर समस्याएं अहंकार से ही जुड़ी हैं, जिसके हटने पर हम सरल और सहज बन सकते हैं। समस्त सँसार में व्यक्त एक ही शक्ति और ऊर्जा ही मन के विकारों पर विजय का सँकल्प देती है। ✒️मनोज श्रीवास्तव