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सुखी दाम्पत्य का आधार

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  करवा चौथ पर, सुखी दाम्पत्य का आधार             @मानव सभी  देवशक्तियाँ हमारे हदयों को एक करें।  जैसे जल आपस में मिल जाता है, वैसे ही पति-पत्नी के मन  और भावनाएं भी  एक-दूसरे से जुड़ी रहें।  समंजन्तु विश्वे देवाः समापो हृदयानि नौ। सं मातरिश्वा सं धाता समु देष्ट्री दधातु नौ।।     (ऋग्वेद) सुखी दाम्पत्य जीवन का आधार केवल रीति-रिवाज नहीं,  बल्कि प्रेम,विश्वास और आपसी समझ है; इसी वैदिक भावना से जुड़ा है करवा चौथ का पर्व। पति-पत्नी के मन और भावनाओं को जोड़ने की  जो कामना ऋग्वेद में की गई है,  उसी की पूर्ति में सहयोगी बनता है करवा चौथ का पर्व! करवा चौथ एक दिन का उपवास नहीं, बल्कि जीवनभर प्रेम,विश्वास और समर्पण  निभाने का सँकल्प है। करवा चौथ का महत्व  अपने मन और व्यवहार को अच्छा बनाने में है; व्रत हमें सँयम,धैर्य और दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना सिखाता है।  जब पति-पत्नी के बीच  विश्वास की मजबूती,  व्यवहार में मिठास, मन में अपनापन और हर परिस्थिति में  एक-दूसरे का साथ देने की भाव...

आत्म बोध की रात्रि

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शरद पूर्णिमा पर, आत्म बोध की रात्रि          @मानव प्रकृति, अध्यात्म और चेतना के त्रिवेणी संगम का महोत्सव है शरद पूर्णिमा! लोकमान्यता है कि शरद पूर्णिमा की  मनभावन रात्रि में चंद्रमा की शीतल किरणों से धरातल पर अमृत की  वर्षा होती है। यह काव्यात्मक कल्पना ही नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और वैज्ञानिक सत्य भी है। इसी पावन ऊर्जा और उल्लास के साथ  जन-मन में दीपोत्सव की  प्रतीक्षा प्रारंभ हो जाती है। हम मूलतः प्रकृति उपासक हैं; जहाँ चंद्रमा की निर्मलता की पूजा होती हो, जहाँ चंद्रमा की किरणों को अमृत वर्षा माना गया है।  यदि पर्व त्योहार भारत के प्राण हैं तो उनमें शरद पूर्णिमा  अमृत प्रदायक है। शरद पूर्णिमा परम पुनीत रात्रि है, जब षोडश कौमुदीय कला संपन्न चंद्र देवता अपनी अमिय-सुधा से संपूर्ण चराचर जगत को  अभिषिक्त करते हैं।  आकाश से झरती धवल,शीतल रश्मियाँ धरा पर अमृत निष्पत्ति कर वनस्पतियों और औषधियों में प्राणतत्व का संचार करती हैं। आयुर्वेद में यह रात्रि सिद्धिप्रदा है,  जहाँ चंद्रमा की शुभ्र ज्योत्स्ना मानव के बाह्याभ्यंतर में...

विजयोत्सव

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  दशहरा पर, विजयोत्सव             @मानव उत्सवधर्मी भारत में हर दिन नई प्रेरणा एवं संदेश का वाहक है,  जो अंतर्मन को सकारात्मक ऊर्जा से भर देता है। इनसे प्रवाहित होने वाली प्यार,एकता व सद्भाव की भावनाएं विविधताओं से भरे इस देश को एकता के सूत्र में बाँधे रखती हैं। अधर्म और उसके परिणाम से दुनिया को अवगत कराना  तथा समाज में नारी सम्मान को प्रतिष्ठापित करना इसका उद्देश्य है। रामलीलाओं के आयोजन  नारी स्वाभिमान को  कलंकित करने वाले  रावण दहन के साथ संपन्न होते हैं। माँ सीता ही नहीं, अहिल्या जैसी शिला बन चुकी नारियों का उद्धार नारी सम्मान् का उत्कृष्ट उदाहरण है। भगवान श्रीराम की विजय गाथा सबके लिए आदर्श हैं, वन में अस्थिसमूह देखकर वे मानवता के लिए  अभिशाप बन चुके  राक्षसों का वध कर  अरण्य सँस्कृति की रक्षा करते हैं। उनके द्वारा रावण का सँहार अपने साम्राज्य की अभिवृद्धि के लिए नहीं,  धर्म की रक्षा के लिए था।  विभीषण का राजतिलक  विजय की उदात्त परिभाषा को व्याख्यायित करता है। अतः विजय किसी व्यक्ति  या राष...

शक्ति की भक्ति

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  शक्ति की भक्ति                @मानव एक शक्ति है, जो सर्वत्र व्याप्त है; वह शक्ति अनेक रूपों में कण-कण में विद्यमान है; वही समस्त सृष्टि की रचयिता है और सँहारक भी। प्रकृति ने माया का रूप  समय के अनुसार भिन्न बनाया है; माया उसी शक्ति का प्रमाण है, पर उसे जानने,समझने,  अनुभव करने से मानव में चेतना मुखर होती है। शक्ति की उपासना कोई कर्मकांड नहीं है; वरन् शक्ति की पूजा-अर्चना  मायातीत ऊर्ध्व चेतना को  जागृत करने में समर्थ है। जीव के लिए विचार और सँकल्प द्वारा मनोबल की यात्रा पूर्ण करना एकमात्र लक्ष्य है; तभी हमारी एक-एक श्वास पर  शक्ति का नियंत्रण है। विभिन्न रूपों और क्षितिज आयामों में  शक्ति का स्फुरण नारायण की इच्छा के अधीन है; हरि की इच्छा शक्ति का प्रवाह है। प्रभु अपनी शक्ति रूपेण देवी का आश्रय लेकर विराम लेते हैं; वे सब कुछ देवी माँ को सौंप कर निश्चिंत हो जाते हैं। देवी का प्राकट्य हर सँकट,बाधा,पाप, अत्याचार और अन्याय को मिटाने के लिए होता है।  शक्ति का भौतिक नाम शाँति है; शाँति ही देवी है; माँ शाँति की क...

सृजन का उत्सव

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  दुर्गा पूजा पर, सृजन का उत्सव            @मानव कहीं ढोलों की थाप मन में उमंग भर रही है तो कहीं शंख की ध्वनि  वातावरण में एक अलग ही भाव जगा रही है। दुर्गा पूजा का उल्लास हर ओर छाया है; यह केवल आस्था का  अवसर नहीं, सृजन को नए अर्थ देने का भी समय है। कोई माँ की निर्भीकता से  प्रेरणा लेता है तो कोई उनके रूपों में  जीवन के रङ्ग उकेरता है; देवी दुर्गा कलाकारों की  सृजन यात्रा में शामिल हैं। दुर्गापूजा पूजा को स्त्रीशक्ति के  उत्सव के तौर पर है; निर्भीकता, लगन और वह शक्ति जो देवी दुर्गा का प्रतीक है। माँ जिस महिषासुर का  दमन करती हैं, वह केवल दानव नहीं है; वह जीवन की वही बाधा है, जो हर व्यक्ति के जीवन में आती है। एक कलाकार के लिए सृजन केवल किसी कलाकृति को आकार देना नहीं, बल्कि अपने भावों और कल्पनाओं को  अभिव्यक्त करना है।  कभी कोई आकृति तो कभी कलात्मक रचना  मन के अनकहे भावों को  सामने ले आती है। दुर्गा पूजा पर देवी के विविध रूप,  उनकी दृढ़ता, चेहरे का तेज और महिषासुर पर विजय की कथा कलाकारों की सृजन...

नौ दुर्गा

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  नवरात्र पर, नौ दुर्गा           @मानव नवरात्रि आत्म शुद्धि का समय है; प्रकृति अपने आप में देवी का स्वरूप है। नवरात्र के पावन अवसर पर पूजित नौ देवियाँ धार्मिक प्रतिमाएँ मात्र नहीं  अपितु आधुनिक प्रतीक भी हैं; प्रत्येक देवी एक मानवीय मूल्य और सामाजिक आदर्श का  प्रतीक है। पर्वतपुत्री शैलपुत्री धरती और प्रकृति से जुड़ाव की प्रेरणा देती हैं; यह देवी हमें बताती हैं कि हमें प्रकृति का सम्मान करके टिकाऊ जीवन शैली  अपनानी चाहिए। देवी ब्रह्मचारिणी तपस्या  और अनुशासन की प्रतीक हैं, जो सँदेश देती हैं कि शिक्षा, आत्मसंयम और स्पष्ट जीवन-दृष्टि से ही  प्रगति संभव है।  चंद्रघण्टा साहस और वीरता की देवी हैं, जो सिखाती हैं कि समाज में  अन्याय,अपराध और शोषण के खिलाफ  निडर होकर खड़ा होना होगा। सृष्टि की रचयिता कुष्माण्डा   आधुनिक युग में रचनात्मकता, नवाचार और सकारात्मक ऊर्जा का  प्रतीक हैं। स्कंदमाता मातृत्व और पालन-पोषण की प्रतीक हैं, जो हमें याद दिलाती हैं कि अगली पीढ़ी को अच्छे सँस्कार देना हमारा कर्त्तव्य है।  कात्...

नकारात्मकता का अँत

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  नवरात्र पर, नकारात्मकता का अँत            @मानव एक ही परम तत्व की अभिव्यक्ति है सँसार! किंतु वह परम तत्व स्वयं को विभिन्न रूपों,ऊर्जाओं और गुणों के माध्यम से  अभिव्यक्त करता है। नवरात्र का पर्व अपनी चेतना को पहचानने और भीतर छिपी शक्ति को जाग्रत करने का पर्व है। देवी के विभिन्न रूप हमारे भीतर छिपी ऊर्जा  नकारात्मकता के अंत की ओर सँकेत करते हैं। जीवन शक्ति ही दिव्यता है और वह भीतर ही विद्यमान है। जब यह जाग्रत होती है  तो नकारात्मकता का अंत  स्वतः ही हो जाता है। नवरात्र केवल माँ दुर्गा की आराधना और गरबा डाँडिया का पर्व नहीं, बल्कि अपने भीतर छिपी  नकारात्मक शक्तियों पर  विजय पाने का भी अवसर है। बुराइयाँ रक्तबीज की तरह हैं, वो आती हैं, हम उन्हें खत्म करते हैं  और वो फिर आ जाती हैं। दुनिया की अधिकतर समस्याएं अहंकार से ही जुड़ी हैं, जिसके हटने पर हम सरल और सहज बन सकते हैं। समस्त सँसार में व्यक्त एक ही शक्ति और ऊर्जा ही मन के विकारों पर विजय का सँकल्प देती है।   ✒️मनोज श्रीवास्तव