सुखी दाम्पत्य का आधार
करवा चौथ पर, सुखी दाम्पत्य का आधार @मानव सभी देवशक्तियाँ हमारे हदयों को एक करें। जैसे जल आपस में मिल जाता है, वैसे ही पति-पत्नी के मन और भावनाएं भी एक-दूसरे से जुड़ी रहें। समंजन्तु विश्वे देवाः समापो हृदयानि नौ। सं मातरिश्वा सं धाता समु देष्ट्री दधातु नौ।। (ऋग्वेद) सुखी दाम्पत्य जीवन का आधार केवल रीति-रिवाज नहीं, बल्कि प्रेम,विश्वास और आपसी समझ है; इसी वैदिक भावना से जुड़ा है करवा चौथ का पर्व। पति-पत्नी के मन और भावनाओं को जोड़ने की जो कामना ऋग्वेद में की गई है, उसी की पूर्ति में सहयोगी बनता है करवा चौथ का पर्व! करवा चौथ एक दिन का उपवास नहीं, बल्कि जीवनभर प्रेम,विश्वास और समर्पण निभाने का सँकल्प है। करवा चौथ का महत्व अपने मन और व्यवहार को अच्छा बनाने में है; व्रत हमें सँयम,धैर्य और दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना सिखाता है। जब पति-पत्नी के बीच विश्वास की मजबूती, व्यवहार में मिठास, मन में अपनापन और हर परिस्थिति में एक-दूसरे का साथ देने की भाव...