स्वयँ का अनुशासन है स्वाधीनता
स्वयँ का अनुशासन है स्वाधीनता @मानव स्वाधीनता का सच्चा अर्थ स्वयं के अधीन यानी अपने अनुशासन और व्यवस्था में जीना है। स्वतँत्रता केवल अधिकारों का उपयोग करना नहीं है, बल्कि अधिकारों के साथ अपने कर्तव्यों का पालन करना भी है। स्वाधीनता में सबसे महत्वपूर्ण स्वयं का अनुशासन है, स्वतँत्रता का अर्थ है स्वयं के तंत्र में रहना, न कि किसी बाहरी या विकृत व्यवस्था के अधीन होना। अपने तँत्र में रहना तभी सार्थक है, जब हमें अपने कर्तव्यों का बोध भी हो। नागरिक कर्तव्यों का पालन करना भी उतना ही आवश्यक है, जितना नागरिक अधिकारों को जानना और माँगना। जिसने कभी परतँत्रता का कष्ट झेला हो, वही स्वाधीनता की असली कीमत और उसकी पवित्रता को गहराई से अनुभव कर सकता है। पराधीन व्यक्ति कभी भी सुख का अनुभव नहीं कर सकता है, पराधीनता एक तरह का अभिशाप होती है। मानव ही नहीं, पशु-पक्षी भी पराधीनता में सुखी नहीं रह पाते, पराधीन सपनेहुँ सुख नाहीं। ( श्रीरामचरितमानस बालकाण्ड) व्यक्ति क...