वेदस्वरूप श्रीजगन्नाथ
रथयात्रा पर, वेदस्वरूप श्रीजगन्नाथ @मानव विष्णुभक्त इंद्रद्युम्न ने साकार विष्णुपूजन हेतु चतुर्धामूर्तियों को स्थापित किया तब से श्रीजगन्नाथ जी की रथयात्रा चल रही है। श्रीजगन्नाथ जी सँपूर्ण वेदों का स्वरूप हैं और उनकी रथयात्रा वैदिक संस्कृति का जयघोष है। जगत अर्थात शरीर, जो क्षयशील है, नाथ अर्थात शरीर स्थित अक्षय आत्मा; जगत में दृश्यमान प्रत्येक जीव जगन्नाथ का स्वरूप है। जगत अर्थात दृश्यमान प्रकृति; नाथ अर्थात प्रकृति को आलोक प्रदान करने वाले सूर्य नारायण। जीव और ब्रह्म एक हैं, यह वैदिक सिद्धांत है; माया द्वारा जीव अलग प्रतीत होते हुए भी ब्रह्म ही हैं। जगन्नाथ वासुदेव (परमात्मा) हैं, बलभद्र संकर्षण (जीव), सुभद्रा प्रद्युम्न (मन) तथा सुदर्शन अनिरुद्ध (अहंकार) हैं। श्रीजगन्नाथ परब्रह्म परमात्मा, श्रीवलभद्र जीवात्मा, श्रीसुभद्रा मायाशक्ति और श्रीसुदर्शन क्रियाशक्ति के रूप में विद्यमान हैं। श्रीजगन्नाथ ही सकल सृष्टि का कारण हैं, कहकर रामानुजाचार्य ने उन्...