बुद्धिमतां वरिष्ठम्
ज्येष्ठ का प्रथम मङ्गल बुद्धिमतां वरिष्ठम् @मानव महाबली हनुमान राम नाम का उद्घोष करके लँका दहन के पश्चात उच्च अट्टहास करते हैं जिससे निशाचर स्त्रियों का गर्भपात हो जाता है- चलत महाधुनि गर्जेसि भारी। गर्भ स्रवहिं सुनि निसिचर नारी॥ गुणों को लेना और दोषों को समाप्त करना; इसी प्रक्रिया के द्वारा हमें भी अपने चित्त को पवित्र करके दुर्वृत्तियों को समाप्त करना है यही विश्व को सँदेश है कि बाहर नहीं, रामराज्य पहले अंदर बनाना होगा। हनुमान जी का सहज स्वरूप ही उस अखण्ड,व्यापक,अनंतरूप राम को पाकर धन्य है, जिसके कारण उनके अंत:करण में पाने और छोड़ने का सँकल्प और विकल्प कभी आता ही नहीं है। ज्ञान स्थिति में सत की विस्मृति उनका स्वरूप है; हनुमान अक्षर स्वरूप होने के कारण उनका क्षरण और क्षय कभी नहीं होता है। उनको अग्नि जला नहीं सकी, पानी डुबा नहीं सका, वायु के वे स्वयं पुत्र हैं; हनुमान जी में अज्ञान जनित अविद्या का अभाव है ऐसा है, जैसे अग्नि में शीतलता सँभव नहीं, बर्फ में गर्मी सँभव नहीं है; ज्ञान में अज्ञान का...