श्रीराम,भारत की चेतना
श्रीराम नवमी पर, श्रीराम,भारत की चेतना @मानव आज फिर वही दिन है, जब प्रकाश का प्राकट्य हुआ था, जब मर्यादा ने आँखें खोली थीं, जब एक नाम ने सँसार को अर्थ दिया था। राम का प्राकट्य इसलिए स्मरणीय नहीं कि वे ईश्वर हैं, बल्कि इसलिए कि उन्होंने मनुष्य होकर भी अपने भीतर के प्रकाश को बचाए रखा। राम ऐसे चरित्र हैं, जो पुत्र,भाई,पति, मित्र,राजा और वनवासी- सभी रूपों में आदर्श हैं; वे व्यक्ति,समाज और राष्ट्र को विनय,सँयम,धैर्य तथा अनुशासन की सीख देते हैं; इसीलिए भगवान श्रीराम मर्यादा पुरुषोत्तम हैं। प्रत्येक परिस्थिति में धर्म और व्यवहार की मर्यादा का पाठ श्रीराम से सीखा जा सकता है। सत्ता प्रायः निरंकुशता को जन्म देती है और निरंकुशता से अहंकार तथा मनमानापन उपजता है, परंतु राम को अहंकार स्पर्श तक नहीं कर सका। वे आजीवन सत्य,शील,करुणा और विनय के प्रतिरूप बने रहे और यही उनके चरित्र की सर्वोच्च प्रेरणा है। श्रीराम राजा होकर भी लोकतांत्रिक मूल्यों के पोषक-संरक्षक थे; उनका लोकतंत्र केवल बहुमत तक सीमित न होकर ...