श्राद्ध का महत्व
श्राद्ध का महत्व @मानव सनातन में आत्मा की अमरता और पुनर्जन्म की मान्यता पितृपक्ष में पितरों को श्रद्धा के रूप में जल अर्पण, पशु-पक्षियों से लेकर विद्वत परंपरा के लोगों खासकर बटुकों एवं गरीबों को भोजन तथा धनदान का प्रावधान करती है। इन उपक्रमों के जरिये परिवार में स्नेह-प्रेम तथा आपसी सद्भाव को अंतर्मन की गहराइयों तक ले जाने का सँदेश परिलक्षित होता है। धरती के सँरक्षक वृक्षों से प्राणवायु मिलती है, परिवार भी वृक्ष के समान है, इसीलिए वंशवृक्ष कहलाते हैं। वँशवृक्ष का मूलभाग ऊपर की ओर होता है तथा शाखाएं नीचे की ओर होती हैं। ( श्रीमद्भागवत गीता ) हरे-भरे वृक्ष की तरह परिवार में खुशियों की हरियाली के लिए पितृपक्ष के प्राविधान आने वाली पीढ़ी को सँस्कारित करने के लिए हैं जो मनुष्य को अन्य जीवों से श्रेष्ठ बनाता है; यह मनुष्य के सुखी जीवन का प्रथम सोपान है। ✒️मनोज श्रीवास्तव