सोमवती अमावस्या
पुरुषोत्तम मास की सोमवती अमावस्या @मानव भारतीय संस्कृति में पर्व,व्रत और विशेष तिथियाँ धार्मिक अनुष्ठान के साथ ही आत्मचिंतन,आत्मशोधन और आध्यात्मिक उन्नति के महत्वपूर्ण अवसर हैं। ये पर्व और साधना-पर्व व्यक्ति को अपने भीतर झाँकने और आत्मविकास के मार्ग पर अग्रसर होने की प्रेरणा देते हैं। सोमवती अमावस्या और पुरुषोत्तम मास तीन श्रेणी के अत्यंत महत्वपूर्ण आध्यात्मिक अवसर हैं जिनका शुभ सँयोग साधना,उपासना और आत्मपरिष्कार के लिए अधिक पुण्यदायी हैं। भारतीय ज्योतिष एवं आध्यात्मिक परंपरा में सोमवार का संबंध भगवान शिव तथा मन के अधिष्ठाता चंद्रमा से है। चंद्रमा मन का प्रतीक है और अमावस्या आत्ममंथन का अवसर, इसलिए सोमवती अमावस्या मन की शुद्धि, विचारों के परिष्कार,सँयम और आध्यात्मिक जागरण के लिए विशेष फलदायी माना गया है। यह तिथि व्यक्ति को बाह्य व्यस्तताओं से हटकर अपने अंत:करण की ओर देखने और जीवन की दिशा का पुनर्मूल्याँकन करने की प्रेरणा देती है। जबकि अधिक मास भगवान विष्णु का प्रिय मास है जिसका मूल उद्देश्य मनुष्य को साँसारिक व्य...