विवेकपूर्ण जीवन ही गणेश पूजा
विवेकपूर्ण जीवन ही गणेश पूजा @मानव गणेशजी विनय और विवेक के देवता हैं, व्यक्ति के जीवन में विनय और विवेक बना रहे, यही गणेश पूजा है। कोई धर्म विवेक को अस्वीकार नहीं कर सकता, विवेकपूर्ण होना ही गणेश पूजा है। विवेक से नाक बढ़ेगी, यानी प्रतिष्ठा बढ़ेगी; विवेक सारभौम सूत्र है; यह जगत कल्याण, मानव कल्याण का सूत्र है। गणेशजी को मोदक पसंद हैं; मोद का का अर्थ है आनंद; कः का अर्थ है 'छोटा अंश'; आध्यात्मिक रूप से यह ज्ञान,मोक्ष और परमानंद का प्रतीक है। हाथ में पकड़ा हुआ मोदक इस बात का प्रतीक है कि गणेशजी के पास अपने भक्तों को आनन्द प्रदान करने की क्षमता है; जहाँ विवेक होता है, वहाँ आनंद आ ही जाता है। विवेक सही और गलत की पहचान करवाता है; विवेकपूर्ण निर्णय लेकर जब व्यक्ति सही मार्ग पर चलता है तो बाधाओं से भी बच जाता है। इसीलिए विवेक रूपी गणेशजी को विघ्नहर्ता 'बताया गया है; क्योंकि विवेक में विघ्न को हरने की क्षमता होती है। मोद यानी सहज आनंद पाने में तीन चीजें बाधक हैं ईर्ष्या,निंदा और द्वेष; विवेक हमें समझ देता है कि इनकी कोई जरूरत नहीं है। विवेक कहता है क...