नमामि गङ्गे तव पाद पंकजम्
गङ्गा दशहरा पर, नमामि गङ्गे तव पाद पंकजम् @मानव माँ गङ्गा अध्यात्म का वह अनंत प्रवाह हैं, जिन्होंने भारत की चेतना को जीवन प्रदान किया है। वे त्रिविध तापों का नाश करने वाली तथा त्रययोगों ज्ञानयोग, भक्तियोग और कर्मयोग की सिद्धि प्रदान करने वाली दिव्य अमृतधारा हैं। भारतीय अध्यात्म,सँस्कृति और सभ्यता की चेतना में यदि किसी दिव्य धारा ने सहस्राब्दियों से जीवन, लोकमङ्गल,मोक्ष और आध्यात्मिक ऊर्जा का अविरल संचार किया है, तो वह है - पतितपावनी, मोक्षदायिनी, भागीरथी "मां गङ्गा"। गङ्गा केवल एक नदी नहीं, अपितु भारत की आत्मा, सनातन संस्कृति की जीवनरेखा तथा ऋषि-परंपरा की अमर वाहिनी हैं। वे भारतीय जनमानस की श्रद्धा,आस्था,तप,साधना और साँस्कृतिक निरंतरता की प्रतीक हैं। भारतीय वाङ्गमय में गङ्गा दिव्य चेतना की मूर्त अभिव्यक्ति हैं, इसीलिए भारत का सनातन धर्मावलंबी अनादिकाल से विनम्र होकर प्रार्थना करता आया है - नमामि गङ्गे तव पाद पंकजम्, सुरासुरैः वंदित दिव्य रूपम्। भक्ति...