आन्तरिक चेतना रँगते रङ्ग

 आन्तरिक चेतना रँगते रङ्ग


             @मानव

पर्वों की निरंतरता

समाज की साँस्कृतिक समृद्धि 

और सामूहिक उल्लास का

सँकेत मानी जाती है;

तभी उत्सवों की भूमि भारत

तीज-त्योहारों की पावन धरा है।


होली केवल पर्व नहीं, 

वरन् भारत की धड़कनों में गूँजता

समरसता का सँगीत है;

रँगोत्सव रङ्गों का ऐसा सँवाद है, 

जिसमें अतीत की राख से 

भविष्य के रङ्ग जन्म लेते हैं। 


रँगोत्सव के दिन

जब रङ्ग चेहरे पर लगते हैं,

तब असर मन पर होता है,

उस क्षण ऊँच-नीच का

अथवा अमीर-गरीब का

कोई प्रश्न नहीं रह जाता है।


रङ्ग सबको एक-सा बना देते हैं-

एक ही हँसी,

एक ही उमंग,

एक ही स्पर्श।


यह बताता है कि विविधता 

विरोध नहीं,सौंदर्य है;

तभी विभिन्न समुदाय मिलकर

राष्ट्र की आत्मा को पूर्ण बनाते हैं।


यहाँ स्त्री उत्सव की केंद्र बिंदु है,

उसकी सक्रियता

शक्ति और स्नेह के

सुंदर सँतुलन का प्रतीक है।


यह एक ऐसा सँतुलन है, 

जिसमें हास्य भी है,

सम्मान भी

और अपनापन भी।


रूठना-मनाना भी

प्रेम का ही एक रङ्ग है;

इस पर्व की शक्ति यही है 

कि यह सामाजिक दीवारों को

नरम कर देता है

और हमें याद दिलाता है

कि यदि एक दिन के लिए 

हम भेद भूल सकते हैं

तो सदा के लिए क्यों नहीं?


ये रङ्ग हमें सिखाते हैं

कि जीवन श्वेत-श्याम नहीं, 

उसमें अनेक स्वर

और छायाएँ हैं।


यदि हम अपने ही रङ्ग को 

सर्वोच्च मानेंगे

तो सँघर्ष जन्म लेगा,

पर यदि हम सब रङ्गों को 

स्वीकार करेंगे

तो एक अद्भुत चित्र बनेगा

समरसता का चित्र।


होली-उत्सव हमें सँदेश देता है

मतभेद छोड़ो,

मनभेद छोड़ो,

क्षमा करो,

गले मिलो;

यह पुनर्मिलन का सँस्कार है।


मनोवैज्ञानिक दृष्टि से होली 

सशक्त तनाव-नाशक उत्सव है;

रङ्गों के साथ खुलकर हँसने, नाचने

और गले मिलने से

तनाव और अकेलेपन की 

भावना कम होती है।


यह पर्व दबे हुए भावों को 

सहज वातावरण में

व्यक्त करने का अवसर देता है;

गिले-शिकवे भूलकर 

मेल-मिलाप कराता

मानसिक बोझ हल्का करता है

और सँबंधों में नई ऊष्मा भरता है;

सामूहिक उल्लास व्यक्ति को

'मैं' से 'हम' की ओर ले जाता है।


होली वास्तविक सँवाद का उत्सव है;

यह पीढ़ी विविधता,समावेशिता

और समानत की बात करती है;

होली उन्हें इन मूल्यों को 

जीने का अवसर देती है।


होली केवल रङ्गों का उत्सव नहीं,

बल्कि मानसिक ताजगी, 

भावनात्मक सँतुलन

और सामाजिक जुड़ाव का 

प्रभावी माध्यम है।


होली मृदुता,सहजता

और अपनत्व का वह त्रिवेणी पर्व है,

जो मन के मैल को

प्रेम की वर्षा में बहा देता है। 


 ✒️मनोज श्रीवास्तव

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