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Showing posts from April, 2026

सोना कितना सोणा

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  अक्षय तृतीया पर, सोना कितना सोणा           @मानव भारतीय सँस्कृति में, स्वर्ण का अलग ही वैशिष्ट्य है; भारतीय समाज में स्वर्ण  सिर्फ एक धातु नहीं, बल्कि अर्थ,आस्थाऔर अस्मिता तीनों का मेल है। भारतीय सँस्कृति में स्वर्ण पूज्य है और है सभी सँस्कार का अङ्ग; यह है हर सँकट का साथी; हमारे देश में सोना सिर्फ धातु नहीं, भावना और भरोसा भी है। सोना हर घर का इमरजेंसी फण्ड है। इस चमकदार पीली धातु को धन,शक्ति और प्रतिष्ठा का  प्रतीक माना जाता रहा है; मंहगाई या मन्दी में भी सोने का भाव आमतौर पर टिकता है,  इसलिए इसे सबसे सुरक्षित  निवेश माना जाता है। हमारी भारतीय सँस्कृति में  स्वर्ण पूज्य है; धार्मिक अनुष्ठानों का  अभिन्न अंग है; हमारे यहाँ स्वर्ण सौभाग्य का कारण माना जाता है। लोकमानस में सोने के प्रति  आध्यात्मिक पवित्रता का भाव है; देवालयों में इष्ट देवी-देवता  स्वर्ण आभूषणों से  सुसज्जित प्रतिष्ठित किए गए हैं; मूर्तियों को सजाने और विशेष पूजा-पाठ में  स्वर्ण का प्रयोग अनिवार्य माना जाता है। मान्यताओं में सोना साक्षात लक...

धर्म-न्याय रक्षक परशुराम

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  परशुराम जयन्ती पर, धर्म-न्याय रक्षक परशुराम         @मानव हिंदू धर्म में छठे अवतार  भगवान परशुराम धर्म और न्याय के प्रतीक हैं; पिता महर्षि जमदग्नि और माँ रेणुका के ब्राह्मण कुल में जन्मे,  पर स्वभाव और कर्म से योद्धा  'ब्रह्म-क्षत्रिय' कहे जाते हैं।  शस्त्र और शास्त्र दोनों में निपुण परशुरामजी के व्यक्तित्व में  ज्ञान और साहस के अद्भुत मिश्रण से भगवान शिव ने परशु प्रदान किया। परशुराम जी का मुख्य उद्देश्य पृथ्वी से अधर्मी और अत्याचारी शासकों का नाश करना और धर्म की स्थापना था; जिससे समाज में न्याय और शाँति कायम हुई। परशुराम केवल योद्धा ही नहीं, बल्कि एक महान शिक्षक भी थे, उन्होंने त्रेतायुग जिन योद्धाओं को  युद्ध और अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा दी उनमें भीष्म,द्रोण कर्ण जैसे शिष्य  युद्ध कला में निपुण बने  और इतिहास में अमर हो गए। परशुराम जी चिरंजीवी हैं जो आज भी पृथ्वी पर रहते हैं और धर्म रक्षा के लिए प्रकट होते हैं, वे सात चिरंजीवियों में से एक हैं। उनकी अमरता और धर्म रक्षा की विशेषता  उन्हें अन्य अवतारों से  सर्वथा...