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ज्ञान परम्परा के अविरत

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  बुद्ध पूर्णिमा पर, ज्ञान परम्परा के अविरत          @मानव भारतीय परंपरा में बुद्ध केवल बौद्ध धर्म के प्रवर्तक नहीं,  बल्कि सनातन वैदिक धरोहर के  एक दिव्य आयाम के रूप में  प्रतिष्ठित हैं। पुराणों में भगवान विष्णु के  अवतार-रूप में स्वीकरण  स्पष्ट करने को पर्याप्त है कि बौद्ध और जैन परंपराएं  भारतीय आध्यात्मिक परिपाटी से सर्वथा अपृथक हैं, उसी के व्यापक,समावेशी  स्वरूप की अभिव्यक्ति हैं। बुद्ध पूर्णिमा केवल ऐतिहासिक स्मरण दिवस नहीं, अपितु भारतीय  आध्यात्मिक चेतना के सातत्य,समन्वय और सार्वभौमिक करुणा के  उद्घोष का पावन अवसर है। इस दिन हम भगवान बुद्ध के  जन्म,ज्ञानप्राप्ति और महापरिनिर्वाण तीनों महत्वपूर्ण घटनाओं का  एक साथ स्मरण करते हैं। भारतीय ज्ञान परंपरा में साधना के दो प्रमुख मार्ग प्रमाण और प्रयोग मार्ग हैं जिनमें भगवान बुद्ध ने मुख्यतः प्रयोग मार्ग अपनाया, जिसमें प्रत्यक्ष अनुभव और साधना से  साधक प्रारंभ करता है और अनुभवजन्य सत्य से ज्ञान की प्राप्ति करता है। यद्यपि दोनों मार्ग एक ही लक्ष्य,मोक...