पत्रकारिता की शक्ति
हिन्दी पत्रकारिता दिवस पर,
पत्रकारिता की शक्ति
@मानव
समाचारों का सँप्रेषण मात्र
पत्रकारिता नहीं,
वरन् यह समाज की चेतना,
लोकतँत्र की आत्मा
और जनभावनाओं की
सशक्त अभिव्यक्ति का
जीवन्त माध्यम है।
पत्रकारिता का मूल उद्देश्य
सत्य को सामने लाना,
जनहित के मुद्दों को उठाना
और सत्ता तथा समाज के बीच
एक जिम्मेदार सेतु बनना है।
निष्पक्ष और निर्भीक पत्रकार
लोकतंत्र का प्रहरी है
जो घटना वर्णन से इतर
समाज को जागरूक, शिक्षित
और सँवेदनशील बनाने का
दायित्व निभाता है।
पत्रकारिता के दो शतक वर्ष
केवल ऐतिहासिक उपलब्धि नहीं,
बल्कि सत्य,साहस
और जनसेवा की
वह निरंतर यात्रा है
जिसने समाज को दिशा देने का
महत्त्वपूर्ण कार्य किया है।
भारत में पत्रकारिता
स्वतँत्रता सँग्राम के समय
केवल व्यवसाय नहीं थी,
बल्कि राष्ट्रसेवा का
एक पावन मिशन थी,
जिसने जनजागरण कर
आँग्ल शासन के विरुद्ध
लेखनी को हथियार बनाया
और जनता में स्वतँत्रता की
अमोघ अलख जगाई।
विश्वसनीयता पत्रकारिता की
सबसे बड़ी पूँजी है;
अतः पत्रकारों का दायित्व
नीर क्षीर विवेक से
तथ्यों की सत्यता परख कर
विश्वसनीय जानकारी
जनता तक पहुँचाने का है।
पत्रकारिता के बदलते स्वरूप में
तकनीक ने पत्रकारिता को
अधिक व्यापक
और प्रभावशाली बनाया है,
पर चुनौतियाँ भी बढ़ी हैं।
छद्म समाचार,
भ्रामक सूचनाएँ
और सोशल मीडिया की
तीव्र प्रतिस्पर्धा
पत्रकारिता के समक्ष
गंभीर चुनौती हैं।
सत्य और न्याय के लिए
अपनी कलम को समर्पितकर
पत्रकारों और संपादकों ने
अपनी निष्ठा,साहस
और समर्पण से
पत्रकारिता को समाज का
चतुर्थ स्तंभ बनाया है।
आज पत्रकारिता का
मूल मूल्यों,
सत्यनिष्ठा,
निष्पक्षता,
उत्तरदायित्व
और जनहित को
सदैव बनाए रखना है।
जब पत्रकारिता स्वतँत्र,निष्पक्ष
और संवेदनशील होगी,
तभी लोकतंत्र मजबूत होगा
और समाज प्रगतिशील दिशा में
अग्रसर होगा।
कलम की यह शक्ति
सदैव जनहित,न्याय
और मानवता के पक्ष में मुखर रहे,
सत्य की मशाल बनकर
समाज को प्रकाश
और मार्गदर्शन देती रहे।
✒️मनोज श्रीवास्तव

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