धर्म-न्याय रक्षक परशुराम
परशुराम जयन्ती पर,
धर्म-न्याय रक्षक परशुराम
@मानव
हिंदू धर्म में छठे अवतार
भगवान परशुराम
धर्म और न्याय के प्रतीक हैं;
पिता महर्षि जमदग्नि
और माँ रेणुका के
ब्राह्मण कुल में जन्मे,
पर स्वभाव और कर्म से योद्धा
'ब्रह्म-क्षत्रिय' कहे जाते हैं।
शस्त्र और शास्त्र दोनों में निपुण
परशुरामजी के व्यक्तित्व में
ज्ञान और साहस के अद्भुत मिश्रण से
भगवान शिव ने परशु प्रदान किया।
परशुराम जी का मुख्य उद्देश्य
पृथ्वी से अधर्मी और अत्याचारी
शासकों का नाश करना
और धर्म की स्थापना था;
जिससे समाज में
न्याय और शाँति कायम हुई।
परशुराम केवल योद्धा ही नहीं,
बल्कि एक महान शिक्षक भी थे,
उन्होंने त्रेतायुग जिन योद्धाओं को
युद्ध और अस्त्र-शस्त्र की शिक्षा दी
उनमें भीष्म,द्रोण कर्ण जैसे शिष्य
युद्ध कला में निपुण बने
और इतिहास में अमर हो गए।
परशुराम जी चिरंजीवी हैं
जो आज भी पृथ्वी पर रहते हैं
और धर्म रक्षा के लिए प्रकट होते हैं,
वे सात चिरंजीवियों में से एक हैं।
उनकी अमरता
और धर्म रक्षा की विशेषता
उन्हें अन्य अवतारों से
सर्वथा अलग करती है।
परशुराम के कार्य और जीवन
समाज और मानवता के लिए प्रेरक हैं,
उनका जीवन यह सिखाता है
कि शक्ति,ज्ञान और कौशल का प्रयोग
हमेशा धर्म और समाज की
भलाई के लिए होना चाहिए।
✒️मनोज श्रीवास्तव

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