शिवत्व की अनुभूति
शिवरात्रि पर्व पर,
शिवत्व की अनुभूति
@मानव
जीवन में शिवत्व की
अनुभूति का पर्व है
महाशिवरात्रि!
शिव और शक्ति के मिलन का
दिव्य उत्सव है यह पर्व!
जो पुरुष और स्त्री ऊर्जा
चेतना और सृजनात्मक शक्ति के
मिलन के प्रतीक का अवसर है।
शिव का अर्थ मङ्गलकारी
और अतिशय कल्याणकारी है;
इसलिए शिवत्व का मार्ग
आत्म-कल्याण का मार्ग है।
आध्यात्मिक साधक योगी
और उपासक
समस्त सृष्टि का स्रोत
इसी पर्व को मानते हैं।
भगवान शिव आदियोगी हैं;
शिवरात्रि का यह अवसर
आँतरिक योग साधना
उपासकों के लिए
विशेष लाभकारी है।
सृष्टि के कण-कण में विद्यमान
शिव तत्व की अनुभूति हेतु
साधकों के लिए यह रात्रि
अंतस को ध्यान की अवस्था में
केंद्रित करने का
दिव्य अवसर है।
यह भगवान शिव के
त्यागमय,ज्ञान,वैराग्य,
करुणा से परिपूर्ण
साधनानिष्ठ जीवन के
आत्म-कल्याणकारी आदर्श का
अनुकरण करने का पर्व है।
इस अवसर की
समस्त धार्मिक क्रियाओं
एवं उत्सवों में
आँतरिक उत्थान
एवं प्रकृति के प्रत्येक तत्व के
कल्याण का सँदेश निहित है।
रात्रि विश्राम का समय है;
शिवरात्रि भी
मन-बुद्धि में विद्यमान
तामसिक तत्वों को
विश्राम देने का समय है।
हमारे अँतःकरण में व्याप्त मलिनता
हमारे शिवत्व को ढक लेती है,
घृणा,द्वेष,ईर्ष्या,लोभ,मोह,
आसक्ति-जैसे दुर्गुण
अंतःकरण के परिवेश को
अशाँत कर देते हैं,
फलतः विश्वव्यापी
शिव रूपी चेतना की अनुभूति से
हम कोसों दूर चले जाते हैं।
शिवरात्रि का यह उत्सव
आत्मिक आनंद का उत्सव है,
जो सत्यम-शिवम-सुंदरम के
आदर्श पर चलने की
साधना है।
इस पर्व में निर्लिप्त,
त्यागमय,
वैराग्यमय जीवन की ओर
बढ़ने का आदर्श विद्यमान है।
महाशिवरात्रि स्वयं के भीतर
शिवत्व
अर्थात कल्याणकारी भाव को
जागृत करने की बेला है।
(आचार्य दीप चंद भारद्वाज के
लेख से प्रेरित)
✒️मनोज श्रीवास्तव

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