मेवाड़ का सूर्य

 मेवाड़ का सूर्य


               @मानव

माई एहड़ा पूत जण,

जेहड़ा राण प्रताप;

अकबर सूतो ओझकै,

जाण सिराणै साँप ॥


जब भी स्वतंत्रता,

समानता,

स्वाभिमान,

शौर्य

और राष्ट्र प्रेम की बात होती है,

महाराणा प्रताप

एक प्रकाश-स्तंभ के रूप में

दृष्टिगोचर होते हैं।


वस्तुतः महाराणा प्रताप की 

शासन व्यवस्था

न्यायपूर्ण

और जन-हितैषी थी।


महाराणा प्रताप की

कर नीति का मूल मंत्र था, 

राज्य जनता से है,

जनता राज्य से नहीं।


मुगलों का कर्ज

तलवार के जोर पर लिया जाता था,

पर राणा का कर भी

जन की स्वीकृति से था। 


शत्रु सेनानायक ने माना

राज्य वैभव खुरासन छीन सकता है,

लेकिन धर्म और धरती सदा रहते हैं,

राणा ने भगवान पर विश्वास रखकर

अपनी प्रतिष्ठा को अमर बना दिया;

ऐसे महान राजा से युद्ध करना भी

सौभाग्य की बात है।

 (अब्दुल रहीम खानखाना)


महाराणा का जीवन चरित्र

तथा उनकी उपलब्धियाँ

उनके सँपूर्ण क्रियाकलाप से

भारत में राष्ट्रवाद को

बल प्राप्त होने के साथ 

युवाओं को राष्ट्र गौरव, 

स्वतंत्रता,

स्वाभिमान

तथा शौर्य जैसी

उदात्त भावनाओं को 

आत्मसात करने का अवसर हैं।


अँशुमाली भी अस्त होता है,

किंतु प्रताप के चरित्र में

वह प्रखरता है

जो कि युग-युगांतर तक 

अमिट.... अक्षय.... अमर 

और चिर वन्दनीय रहेगा।


✒️मनोज श्रीवास्तव

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