भगवान के सन्देशवाहक
ज्येष्ठ कृष्ण द्वितीया
नारद जयन्ती पर
भगवान के सन्देशवाहक
@मानव
देवर्षि नारद का जीवन
भक्तिमय,अद्भुत
और प्रेरणादायक था
जिन्होंने श्रीहरि के
लोकहित के सँदेशों का
सर्वत्र प्रसार किया;
भगवान कृष्ण का भी मत है
देवर्षियों में मैं नारद हूँ
देवर्षीणाम् च नारदः
(श्रीमद्भागवत गीता
दशम अध्याय 26वाँ श्लोक)
श्री नारद ने भक्तिमय जीवन में
भगवान विष्णु के भजन
और कीर्तन में रत रहकर
जनहित में समाचारों
और घटनाओं को
प्रसारित किया,
व देवताओं,ऋषियों
और मनुष्यों के बीच
संवाद स्थापना की।
उनकी यह भूमिका
सृष्टि के सामञ्जस्य को
बनाए रखने के लिए
महत्वपूर्ण थी
वह भगवान के ज्ञान
व सन्देश को
हर व्यक्ति तक पहुँचाने के लिए
कार्य करते थे।
नारद पुराण में
भक्ति,ध्यान,योग
और धर्म के विभिन्न पहलुओं का
विस्तृत वर्णन है।
नारद भक्तिसूत्र भी
भक्ति पर आधारित
जो भक्ति के विभिन्न मार्ग
और सिद्धांत निरूपित करता है।
नारद जी बिना किसी बाधा के
यात्रा कर सकते थे
वे कहीं ठहरते भी नहीं थे,
इसलिए वे भगवान का
मन कहे जाते हैं।
भगवान शिव ही
नारद के प्रेरक थे
जिन्होंने नारद जी को बताया
कि भगवान विष्णु की भक्ति ही
सच्चे सुख का मार्ग है।
नारद जी की भक्ति,
उनके कार्य और समर्पण
हमें यह सिखाते हैं
कि जीवन में सच्ची भक्ति
और भगवान की कृपा से
हम किसी भी कठिनाई को
पार कर सकते हैं।
श्री नारद जयन्ती
हमें अपने जीवन में भक्ति
और सत्कर्मों का पालन
करने की प्रेरणा देती है।
✒️मनोज श्रीवास्तव

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