गीता एक दिव्य प्रेरणा
गीता जयन्ती पर गीता एक दिव्य प्रेरणा @मानव श्रीकृष्ण तथा अर्जुन का सँवाद मानव जीवन में प्रत्येक व्यक्ति के मानस में हो रहे अँतद्वंद्वों का भी प्रतीक है। अर्जुन के मन में जो सँघर्ष पैदा हुआ वही तो हर व्यक्ति के मानस में चलायमान रहता है; भीतरी सँघर्ष के समय में मनुष्य की आत्मा निर्बल पड़ जाती है। गीता में वर्णित श्रीकृष्ण का चिंतन जीवन की ऐसी परिस्थितियों में मनुष्य को दिव्य साँत्वना प्रदान करता है। श्रीकृष्ण द्वारा गीता के ज्ञान में जीवन की परम शाँति, लौकिक तथा पारलौकिक कल्याण का चिंतन,समावेशित है। गीता का सार्वभौमिक चिंतन गहन होते हुए भी जीवन का स्पष्ट मार्ग प्रदर्शन करता है। भक्ति योग,ज्ञान योग और कर्म योग की त्रिवेणी इस पावन गीता में मानव जीवन से सँबंधित दुखों और समस्याओं का समाधान निहित है। जीवन पथ पर बढ़ते हुए प्रत्येक मानव के जीवन में ऐसी विकट परिस्थितियाँ उपस्थित हो जाती हैं, जिनसे वह हताश,निराश तथा दुखी हो जाता है। गीता का चिंतन मनुष्य को कामना तथा...