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Showing posts from December, 2024

परंपरा के प्रथम गुरु

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 दत्तात्रेय जयंती पर परंपरा के प्रथम गुरु            @मानव भगवान दत्तात्रेय ब्रह्मा,विष्णु और महेश के  समेकित रूप में पूजनीय हैं। वे सृष्टि के प्रथम गुरु हैं, आदिगुरु और सर्वज्ञ हैं, गुरु वंश के प्रथम गुरु,  साधक,योगी और वैज्ञानिक हैं। दत्तात्रेय महर्षि अत्रि और माता अनुसूया के पुत्र हैं; वे ब्रह्मा के सृजनात्मक गुण,  विष्णु के पालनकारी गुण  और महेश के संहारक गुण से  पूर्ण माने जाते हैं। उन्हें निराकार और साकार  दोनों रूपों में पूजा जाता है; उनकी उपासना से भक्ति,  ज्ञान और मुक्ति प्राप्त होती है। हिंदू मान्यतानुसार दत्तात्रेय ने पारद से  व्योमयान उड्डयन की शक्ति का पता लगाया और चिकित्सा विज्ञान में  महत्वपूर्ण शोध किए, चिकित्सा वैज्ञानिक जिसे आज तक शिरोधार्य करते हैं। दत्तात्रेय को शैवपंथी शिव के अवतार तथा वैष्णवपंथी विष्णु के अंशावतार मानते हैं। दत्तात्रेय नाथ संप्रदाय की  नवनाथ परंपरा के अग्रज माने जाते हैं; रसेश्वर संप्रदाय के प्रवर्तक  दत्तात्रेय ही हैं। गुरु के रूप में पूजनीय भगवान दत्तात्रेय ...

सिय रघुबीर बिबाहु

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  सिय रघुबीर बिबाहु         @मानव श्रीराम का यश मङ्गल का धाम है; राम-सीता का नाम स्वयं ही  सकल सुमंगल दायक है। सीता और राम का मिलना ही अद्वैत है, द्वैत है, विशिष्टाद्वैत तथा द्वैताद्वैत भी है। सीता जी ने श्रीराम को  माला पहना दी और श्रीराम ने सीता जी को; दोनों को माला का सुमेरु मिल गया; शक्ति और शक्तिमान मिलते है, तो वे सृष्टि के आराध्य हो जाते हैं। गुरु के पूजन के लिए पुष्प लेने जाना श्रीराम की साधना बनी और पार्वती जी का पूजन करने जाना सीता जी की। पार्वती जी और गुरुदेव ने दोनों को आशीर्वाद दिया  कि जो तुमने मन में रच रखा, वही सुंदर,सुजान,शीलनिधान वर तुम्हें मिलेगा। जब हृदय में श्रद्धा की ऋतु  बसंत बनकर आती है, तभी कामना का बीज  सुफल को जन्म देता है; तब सकामता और निष्कामता धन्य होकर 'सम' समधी हो जाते हैं। अपनी कन्या को हृदय से लगाकर जनक जी का विलाप करना   अज्ञान और मोह नहीं है,  अपितु ज्ञान का फल है; ज्ञान जब पक जाता है तो हृदय नेत्रों के रास्ते बहने लगता है। ज्ञानी की वाणी से जब भक्ति निकलती है तो वह ज्ञान का फल होता है...