सिय रघुबीर बिबाहु
सिय रघुबीर बिबाहु
@मानव
श्रीराम का यश
मङ्गल का धाम है;
राम-सीता का नाम
स्वयं ही
सकल सुमंगल दायक है।
सीता और राम का मिलना ही
अद्वैत है,
द्वैत है,
विशिष्टाद्वैत
तथा द्वैताद्वैत भी है।
सीता जी ने श्रीराम को
माला पहना दी
और श्रीराम ने सीता जी को;
दोनों को माला का
सुमेरु मिल गया;
शक्ति और शक्तिमान मिलते है,
तो वे सृष्टि के
आराध्य हो जाते हैं।
गुरु के पूजन के लिए
पुष्प लेने जाना
श्रीराम की साधना बनी
और पार्वती जी का
पूजन करने जाना
सीता जी की।
पार्वती जी और गुरुदेव ने
दोनों को आशीर्वाद दिया
कि जो तुमने मन में रच रखा,
वही सुंदर,सुजान,शीलनिधान
वर तुम्हें मिलेगा।
जब हृदय में श्रद्धा की ऋतु
बसंत बनकर आती है,
तभी कामना का बीज
सुफल को जन्म देता है;
तब सकामता और निष्कामता
धन्य होकर
'सम' समधी हो जाते हैं।
अपनी कन्या को
हृदय से लगाकर
जनक जी का विलाप करना
अज्ञान और मोह नहीं है,
अपितु ज्ञान का फल है;
ज्ञान जब पक जाता है
तो हृदय नेत्रों के रास्ते
बहने लगता है।
ज्ञानी की वाणी से
जब भक्ति निकलती है
तो वह ज्ञान का फल होता है
और वही श्रुति हो जाती है;
जो वाणी का विषय होगा,
वही तो श्रुति का विषय होगा।
जब अर्थ धर्मानुगामी होगा,
काम मोक्षानुगामी होगा,
तभी होता है
सीता-राम का विवाह।
यह विवाह-प्रसंग
देह के मिलन का नहीं,
देह और विदेह की धन्यता का है;
जनक की निष्कामता
इस विवाह में धन्य हुई
तो दशरथ की सकामता
मोक्ष-राम,
धर्म-भरत,
काम- लक्ष्मण
और अर्थ-शत्रुघ्न को जन्म देकर
अब धन्यता को प्राप्त हुई।
यही जीवन और व्यवहार का सत्य है,
जिसकी परिणति है
श्रीराम का राज्य
और देह और विदेह की
धन्यता और कृतकृत्यता ।
मोक्ष-राम की पत्नी सीता,
मोक्ष की क्रिया भक्ति हैं,
धर्म-भरत की पत्नी मांडवी,
धर्म की श्रद्धा क्रिया हैं,
काम-लक्ष्मण की पत्नी उर्मिला,
काम की योग क्रिया हैं,
अर्थ-शत्रुघ्न की पत्नी श्रुतिकीर्ति,
अर्थ की दान क्रिया है।
जब हम धर्म,अर्थ,काम व मोक्ष को
उनकी शुद्ध क्रियाओं द्वारा
प्राप्त करते हैं,
तभी हमारे जीवन में
रामविवाह होकर
उसका चरम फल भी
प्राप्त हो जाता है।
श्रीराम और सीता का मिलन
मात्र शरीर का न होकर
एक विशुद्ध और व्यापक
विचारधारा का सृजन है
कि हम जीवन को कैसे जिएं,
कैसे व्यवहार करें।
समधी,गुरुओं,परिजनों,स्वजनों को
स्त्री,पुरुष,युवा,वृद्ध सबको
समान आनंद का अनुभव कैसे हो
कैसे ज्ञान और भक्ति,
दोनों किनारों को मिला दें।
यही रामविवाह का अर्थ
और उद्देश्य है
जिससे राम विवाह में
सकामता और निष्कामता
दोनों परिपूर्ण हो गई।
✒️मनोज श्रीवास्तव

Comments
Post a Comment