कश्मीर के बहाने

 कश्मीर के बहाने


कश्मीर में आतंकियों के खिलाफ जंग चल रही है। टारगेट किलिंग में मारे गए हिंदुओं का बलिदान सेना और पुलिस के बलिदानों से कहीं कम नहीं।तथाकथित कश्मीरियत की बात करने वाले राजनीतिक दल कश्मीरी हिंदुओं के टारगेट किलिंग की रस्मी तौर पर निंदा करके कर्तव्य की इतिश्री कर रहे हैं। आखिर यह कैसी कश्मीरियत है जो घाटी के हिंदुओं के साथ हर उस कश्मीरी की जान का दुश्मन बन गई है जो भारत की बात करता है?


इस देश में कोई नाम पूँछने के बाद टैक्सी पर बैठने से मना कर दे तो विमर्श छिड़ जाता है।डिलवरी ब्वॉय का नाम पूँछकर कोई सामान लौटा दे तो अखबारों में महीनों तक आलोचनात्मक संपादकीय छपते हैं।पर नाम पूँछ-पूँछ कर गोली मार देना जैसे कोई अपराध ही नहीं?


यदि बचे-खुचे कश्मीरी हिंदू सचमुच घाटी छोड़कर चले जाते हैं तो आतंकी संगठनों का एजेंडा ही पूरा होगा।

~मनोज श्रीवास्तव

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