संबंधों का मूल
संबंधों का मूल
@मानव
श्राद्ध शब्द श्रद्धा से बना है;
छोटे हों या बड़े,
सभी दिवंगत आत्माओं के लिए
श्राद्ध होता है।
जीते जी छोटे व बड़ों के लिए
हम अपने स्नेह,श्रद्धा
व सम्मान का जितना अधिक
उपयोग करेंगे,
उतना हमें छोटों से सम्मान,
बड़ों से आशीर्वाद
और पूर्वजों से शक्तियाँ मिलेंगी।
हर संबंध की
एक भौतिक पहचान
या नाम होता है,
यह सामने वाले पर निर्भर है
कि उसका संबंध
दूसरे के साथ कैसा होगा।
दो आत्माओं के बीच का
संपर्क सम्बन्ध है,
जो हमारे स्वयं के साथ संबंध की
गुणवत्ता पर निर्भर करता है।
आत्मा के साथ हमारा संबंध
प्रेमपूर्ण तब होगा,
जब स्वयं का
अपने अंतरात्मा के साथ
संबंध प्रेममय होगा।
प्रेम हमारी अंतरात्मा का
मूल गुण या स्वभाव है;
प्रेम करना व पाना;
दूसरों के साथ
संबंध स्थापित करने का अर्थ है,
दूसरों से प्रेमपूर्वक व्यवहार करना;
दोनों एक-दूसरे के पूरक हैं।
जब हम बाहरी और आंतरिक
दोनों आयामों को
अलग कर देते हैं,
तो हमारे संबंध
सुंदर नहीं बन पाते हैं।
हमें देखना होगा
कि क्या हम अच्छे शब्दों का
चयन करने
और अच्छे व्यवहार
करने के साथ-साथ,
दूसरे व्यक्ति की
अच्छाई व भलाई के बारे में भी
सोच रहे हैं?
किसी भी संबंध को
निर्माण करने में,
हमारी विचार या भावनाएँ
अधिक महत्व रखती हैं;
क्योंकि संबंध
दो आत्माओं के बीच
ऊर्जा का आदान-प्रदान है।
संबंधों में एक-दूसरे के लिए
अच्छा करना भी
महत्व रखता है;
मजबूत रिश्ते
बाहरी दिखावे,
झूठी प्रशंसा पर नहीं टिकते हैं;
इसकी स्नेह,श्रद्धा व विश्वास वाली
भावनात्मक नींव कमजोर रहती है।
वस्तुतः स्थाई संबंधों का आधार
हमारी सोच और विचार ही है।
आज हमारा जो बच्चा है,
हो सकता है वह हमारे
पूर्वज आत्माओं में से एक हो,
अतः चाहे घर के बुजुर्ग हों या बच्चे,
सबके प्रति हमारी शुभ भावना,
शुभ कामना
और संवेदनशील आचरण
सदा बना रहे।
हमें अपनी चेतना,चिंतन,
दृष्टि,वृत्ति,बोल,व्यवहार
और भावनाओं को
आत्मिक बनाना होगा।
इस आत्मबोध के आधार पर ही
मधुरता,स्नेह,श्रद्धा,दया,
करुणा,आदर,सम्मान
और संवेदनशीलता आदि
मानवीय मूल्य विकसित होंगे।
आत्मिक गुणों को अपनाने के लिए
आंतरिक शक्ति
और क्षमताओं को
बढ़ाने की आवश्यकता है।
इससे हम न केवल अपने जीवन,
आचरण और सांसारिक संबंधों को
बेहतर बना सकते हैं,
अपितु पूरे विश्व परिवार के
जीवित तथा दिवंगत
आत्माओं के लिए
शांतिपूर्ण व सुखमय
गति एवं सद्गति का मार्ग
प्रशस्त कर सकते हैं।
✒️मनोज श्रीवास्तव

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