मन की शाँति का पर्व

 मन की शाँति का पर्व


           @मानव

शरद पूर्णिमा

न केवल एक धार्मिक पर्व है, 

बल्कि यह मन की शाँति 

और आंतरिक आनंद

प्राप्ति का भी अवसर है।


इस दिन रात्रि में

योगेश्वर श्रीकृष्ण जी ने 

गोपियों के सँग

महारास रचाया था

और सत्पात्रों में

विशेष अनुकंपा बाँटी थी।


योगेश्वर श्रीकृष्ण का 

आशीष पाने के लिए

इस दिन के विविध उपायों में

कोजागरी व्रत

सर्वश्रेष्ठ व्रतों में से है।

       (स्कंद पुराण)


यह महालक्ष्मी की

उपासना का भी पर्व है;

इस समय महालक्ष्मी 

विचरण करती हैं।


महालक्ष्मी प्रसन्न होकर 

आराधना करने वालों के 

मन को शाँति प्रदान करती हैं

उन्हें धनधान्य से

परिपूर्ण करती हैं।

 (सनत कुमार संहिता)


शरद पूर्णिमा पर

ध्यान और साधना करने से 

मन में शाँति

और संतोष की 

अनुभूति होती है।


यह आत्मा को

उच्चतर स्तर पर

पहुँचाने का एक साधन है;

सकारात्मक विचारों को 

अपनाने से

मानसिक शाँति मिलती है।


शरद पूर्णिमा को चंद्रमा 

सोलह कलाओं से

परिपूर्ण होने के साथ

पृथ्वी के सर्वाधिक निकट होता है।


इस दिन चन्द्रमा

विविध औषधियुक्त 

दिव्य किरणों को

पृथ्वी पर बरसाता है,

जो मनुष्य के मन की

शाँति के लिए कार्य करती हैं।


ज्योतिषीय ग्रंथों में चंद्रमा को

मन का कारक माना गया है; 

चंद्रमा को औषधियों का 

स्वामी भी कहा गया है।


जीवनदायिनी

रोगनाशक जड़ी-बूटियों को 

शरद पूर्णिमा की

चाँदनी में रखकर

अमृत से नहाई जड़ी-बूटियों से

तैयार की गई दवा

रोगी के तन पर

तत्काल असर करती है।


इस दिन रात भर

चावल की खीर बनाकर

चंद्रमा के प्रकाश में

रात भर रखकर

उसे सुबह खाने से

तन-मन निरोगी होता है। 


 ✍️मनोज श्रीवास्तव

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