धनत्रयोदशी

 धनत्रयोदशी


           @मानव

दीपावली का अवसर

पाँच पर्वो की नदियों के 

सँगम जैसा है;

इसमें डुबकी लगाने से 

जीवन में स्वास्थ्य,चरित्र

एवं बुद्धि-धन की

प्रचुरता सदा बनी रहेगी।


दीपावली धनतेरस के साथ आती है;

सबका धन अलग-अलग है; 

कोई सोने-चाँदी को

धन मानता है,

कोई कलम-दवात को;

कोई सुख-भोग के संसाधनों को,

कोई मन की शाँति को।


लेकिन धनतेरस का संदेश है-

'पहला सुख निरोगी काया';

'शरीरमाद्यं खलु धर्मसाधनम्।'

 (महाकवि कालिदास)


धर्म का सर्वप्रमुख साधन तो 

हमारा शरीर ही है;

लक्ष्मी स्वस्थ देह में

और स्वच्छ गेह में ही

निवास करती है।


धनतेरस अपने परिवेश में 

स्वास्थ्य की चेतना को 

जगाने का दिन है;

स्वास्थ्य ही तो धन है;

इसी पर तो रूप की प्रतिष्ठा है।


धन-त्रयोदशी के ही दिन

आयुर्वेद के देवता

भगवान धन्वंतरी की जयंती

मानव को सन्देश देती है

कि स्वास्थ्य भी एक धन है। 


यदि भौतिक संपदा का 

आनंद उठाना है

तो यह स्वास्थ्य-धन के अभाव में

कभी सँभव नहीं हो सकेगा;

इसीलिए स्वास्थ्य

एक बड़ी सँपदा है।


मन के मंदिर में

फिर सुनाई देने लगता है 

जीवन के उत्सव का

नया मंगलाचरण।


 ✒️मनोज श्रीवास्तव

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