रूप चौदस

 रूप चौदस


           @मानव

दीपावली के पर्व

कृष्ण पक्ष में होते हैं

जो अपनी ऊर्जा से 

आंतरिक जगत के अंधकार को

उजाले में बदल देगा।


पर्व की द्वितीय श्रृंखला पर

नस-नाड़ियों के जाल से 

संचालित शरीर में

सद्भाव का चतुर्मुखी दीप 

प्रज्वलित करना ही

नरक चतुर्दशी है।


इससे दीपावली के दिन

मनुष्य के रोम-रोम से

ऊर्जा की ज्योति

जागृत होने लगेगी,

रोम-रोम के ऊर्जान्वित होते 

ब्रह्मांडीय ऊर्जा भी

शरीर में प्रवेश करने लगेगी।


रूप चौदस

रूपांतरण के

आह्वान का त्योहार है;

यह रूपांतरण है

हमारे तन-मन का,

हमारी चेतना का,

हमारे घर-परिवार का,

हमारे राष्ट्र का

और राष्ट्र के धर्म का।


प्रत्येक मनुष्य के रूप की 

अपनी लक्ष्मी है,

उसका अपना वैभव है;

जब तक वह लक्ष्मी नहीं जागेगी,

तब तक मन के आंगन में 

प्रेम का दीप कौन संजोएगा?

प्रेम का उजास कहां होगा?


इतने बड़े अनुष्ठान के लिए 

इतना बड़ा दिन

सौगात में दे गए हैं

हमारे पूर्वज!

और हम अपने चेहरों पर 

केवल उबटन ही

मलते रह गए।


मन का आकाश

सितारों से जगमग न हो,

तो समझ लो,

दीपावली आई

और मुँह फेर कर चली भी गई।


 ✒️मनोज श्रीवास्तव

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