नाम खुमारी नानका...
कार्तिक पूर्णिमा प्रकाश पर्व पर
'नाम खुमारी नानका...
@मानव
दक्षिण भारत से प्रारंभ हुए
भक्ति आंदोलन ने
उत्तर भारत में
क्रांतिकारी परिवर्तन किए;
जिसने मध्यकाल में
भारतीय धर्म व दर्शन के
पुनर्जागरण में
महती भूमिका निभाई।
सन्त कवियों का ध्येय था
ऐसे समाज का निर्माण करना
जहाँ भेदभाव की दीवारें न हों,
जो गुरुनानक देव की वाणी में
सत्य होता दिखा।
गुरुनानक देव की वाणी ने
भटके हुए लोगों को
नया मार्ग दिखाया;
उन्होंने किरत करना,
नाम जपना
व बण्ड छकना सिखाया
जो उनके दर्शन का
मूलभूत सन्देश है।
'किरत करो,नाम जपो
और बंड छको' का तात्पर्य है
मनुष्य अपनी मेहनत की
कमाई करता हुआ
प्रभु का सुमिरन करे
और मिल-बाँटकर खाए।
गुरु नानक देव ने
समाज को अंधविश्वास
व दुराचरण के प्रति
सचेत किया
और हमें अपने अस्तित्व के प्रति
जाग्रत किया।
जपुजी साहिब में
जिस ऊँचे आचरण का पक्ष
गुरु नानक देव लेते हैं,
वह पाखंड के विरुद्ध
जयघोष है।
ज्ञान व प्रेम को जीवन का
मूलाधार मानने वाले
नानक देव जी चाहते थे
कि जन साधारण
पलायनवादी न हो,
क्योंकि मुक्ति जंगलों में
भटककर नहीं,
अपितु घर-परिवार में रहते हुए
जीवन के संघर्षों से
जूझते हुए प्राप्त हो सकती है।
गुरुनानक देव जी का
संसार के बारे में मत है
इस संसार में हरेक व्यक्ति
दुखों से घिरा हुआ है।
'नानक दुखिया सब संसार।'
कोई न कोई दुख
सबको लगा हुआ है,
जब समस्या आती है
तभी हमें प्रभु याद आते हैं
और जब सब कुछ ठीक हो
हम अपने कार्यों में
व्यस्त हो जाते हैं।
दुख और सुख का यह चक्र
हमारे जीवन में चलता रहता है
पर जो परमेश्वर के नाम से जुड़ गया
वही सुखी है;
'सो सुखिया जो नाम आधार।'
(संत कृपाल सिंह जी)
जो नाम की खुमारी है,
जो प्रभु का अमृत
हमारे अंदर बरस रहा है,
जब ध्यान-अभ्यास द्वारा
हम अपने अंतस में
उसका अनुभव करते हैं
तो उसका आनंद
सदैव हमारे साथ रहता है।
'नाम खुमारी नानका,
चढ़ी रहे दिन रात।'
(गुरु नानक देव जी)
जब हमारी आत्मा
यह अनुभव करती है
तो उसका मिलाप
पिता परमेश्वर से हो जाता है,
यही सदा सुख प्राप्ति साधन है।
गुरु वाणी का आकाश
सार्थक सच्चाइयों में व्याप्त है,
जहाँ न भय है,
न वैर है,
न विरोध है
और न ही असत्य है।
गुरु नानक देव की दृष्टि में
दुख व सुख
तभी तक प्रभावित कर सकते हैं,
जब तक मानव
'नाम' की महिमा से
अवगत नहीं है।
हम सब एक ही पिता-परमेश्वर के
परिवार के सदस्य हैं;
हम आपस में प्रेमपूर्वक रहें
और एक-दूसरे की मदद करें,
तो हम अपने भीतर प्रभु के
प्रेम का अनुभव करेंगे।
वैश्वीकरण के दौर में
त्याग व सेवा
मानव का सर्वोच्च आदर्श है,
और नानक वाणी की
अमृत-संजीवनी
सबके लिए कल्याण का मार्ग है।
इसी से हमें जीवन जीने की
सही राह मिलेगी
गुरु नानक देव जी महाराज के
प्रकाश पर्व को
सही मायनों में मनाने की
यही औचित्य है।
✍️मनोज श्रीवास्तव

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