सँविधान लोकतंत्र की आत्मा
सँविधान लोकतंत्र की आत्मा
@मानव
सँविधान की पृष्ठभूमि में
भारतीय विचारों
व मूल्यों की आधारभूमि है;
अपना संविधान
राष्ट्र की ही अभिव्यक्ति है।
सँविधान भारतीयों के गौरव
तथा भारत की एकता
इन दो मूल मंत्रों को
साकार करता है।
सँविधान सुनिश्चित करता है
कि समाज की
अंतिम पंक्ति में बैठे व्यक्ति भी
राष्ट्र के विकास में
अपना योगदान दे सकें।
हमारे गणराज्य का लक्ष्य है
समाज में न्याय,स्वतंत्रता
और समानता स्थापित करना;
ये तीनों मंत्र
भारतीयता के प्रतिमान हैं;
बंधुत्व को प्रोत्साहित करना ही
भारतीयता है।
हमने केवल समानता की
बात नहीं की;
हमने जो बात कही,
वह है परस्पर करुणा,
आत्मीयता,
सँवेदनशीलता;
एक-दूसरे को अपना मानना,
यह हमारा वैशिष्ट्य है।
सँविधान की प्रस्तावना
भारतीयता की आत्मा है;
इसकी विशेषता है-
'वंचित वर्ग के लिए
सकारात्मक क्रिया';
पहला अधिकार,
घर के कमजोर का होता है,
यही भारतीयता है;
यह अद्वितीय है,
यह भारतीयत्व है।
संविधान की 'उद्देशिका' में
सबको बाँधे रखने के सूत्र
विशद रूप से वर्णित हैं;
इसमें सामाजिक
आर्थिक
राजनीतिक
न्याय,
अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता;
विश्वास,
श्रद्धा,
उपासना-पद्धति की स्वतंत्रता;
स्तर और अवसरों की समानता
व राष्ट्र की एकता
और एकात्मता का
आश्वासन देने वाले
बंधुत्व का समावेश है।
राष्ट्र का अर्थ है
देश में रहने वाले सभी लोग
एक-दूसरे से
भावनात्मक रूप से
गहराई से जुड़े होने चाहिए;
बंधुत्व इस तरह की
भावनात्मक एकता का
निर्माण करता है।
भारत का सँविधान
भारतीय लोकतंत्र की आत्मा है;
यह श्रमसाध्य कार्य
सूझ-बूझ,
व दूरदर्शिता से ही संभव है।
सँविधान में एक राष्ट्र के
नागरिकों के रूप में
हम सबको आबद्ध करने की शक्ति
तथा हमारी सामूहिक शक्ति
समाहित है।
समय की माँग है
कि हम सत्यनिष्ठा
और समर्पित भाव से
इस शक्ति और सँविधान में
निहित बातों के प्रति
जन-जन को परिचित कराने का
निरंतर प्रयास करें।
इसी सँविधान के प्रकाश में,
सँविधान निर्माताओं के
विचारों के दिव्य आलोक में
नए भारत का निर्माण
हम सबका दायित्व है।
✒️मनोज श्रीवास्तव

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