वसुधैव कुटुम्बकम्
वैश्विक परिवार दिवस
वसुधैव कुटुम्बकम्
@मानव
भारत सदा से
विश्व बंधुत्व की भावना के
सिद्धांत को अपनाकर
उसी मार्ग पर चलाता आ रहा है;
यह दुनिया का एकमात्र ऐसा देश है
जो हमेशा से सभी को
साथ लेकर चलने का
प्रयास करता रहा है।
दुनिया के किसी भी देश में
कैसा भी संकट आया हो
भारत उसके साथ
कंधे से कंधा मिलाकर
खड़ा नजर आता है;
यही है विश्व बंधुत्व की भावना।
वैश्विक परिवार दिवस
दुनिया का कोई देश
यदि सही मायने में मनाता है
तो वह भारत ही है;
जहाँ आज भी
अतिथि देवो भव की भावना
साकार है;
यहाँ के जन स्वयं भूखे रहकर
अतिथियों को भोजन करवाना
अपना परम धर्म समझते रहे हैं।
वैश्विक परिवार का अर्थ है
वसुधैव कुटुम्बकम्
इसका मूल सिद्धांत यह है
कि संपूर्ण मानवता
एक परिवार है;
किसी भी राष्ट्र,जाति
या धर्म का व्यक्ति
एक ही व्यापक परिवार का हिस्सा हैं
विश्व में सभी का समान महत्व है
और हर किसी को
समान सम्मान मिलना चाहिए।
वैश्विक परिवार दिवस
वस्तुतः विश्व शाँति दिवस है;
जो दुनिया में सद्भाव
और एकता की अवधारणा को
जीवन्त करने के लिए
प्रति वर्ष मनाया जाता है।
दुनिया एक वैश्विक गाँव
यह इस विचार पर जोर देता है;
जिसमें नागरिकता,सीमा
या नस्ल की परवाह किए बिना
हम सभी एक परिवार हैं।
एक खुशहाल परिवार
वह परिवार नहीं है
जिसमें हर कोई
एक दूसरे के जैसा सोचता,
काम करता,
महसूस करता
या व्यवहार करता हो;
एक खुशहाल परिवार की
मूल पहचान यह है
कि पूरा परिवार एक दूसरे को
वैसे ही स्वीकार करता है।
वैश्विक परिवार दिवस को
शाँति और साझाकरण के
वैश्विक दिवस के रूप में
मनाने का उद्देश्य
बहुसंस्कृतिवाद,
बहुलवाद को बढ़ावा देना
और शाँति और सद्भाव के साथ
एक-दूसरे के साथ रहना सिखाना है।
इसका उद्देश्य एकजुट होना
और इस विचार को बढ़ावा देकर
शाँति का संदेश फैलाना है
कि पृथ्वी एक वैश्विक परिवार है;
ताकि दुनिया को
सभी के रहने के लिए
एक बेहतर जगह बनाया जा सके।
दुनिया में युद्ध का वातावरण है;
देशों में युद्ध छिड़ा हुआ है
तो कुछ युद्ध के मुहाने पर हैं;
तीसरे विश्व युद्ध की आशंका है;
ऐसे में वैश्विक परिवार दिवस
हमारे लिए आशा की
नई किरण लेकर आता है;
जो विश्व को एक परिवार के रूप में
बनाने की प्रेरणा देता है।
वैश्विक परिवार दिवस की
अवधारणा के अनुरूप
एक दूसरे के प्रति
सहयोग की भावना से
दुनिया शाँति के पथ पर
चलने लगेगी
और इस दिवस की
सार्थकता भी सिद्ध होगी।
✒️मनोज श्रीवास्तव

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