उत्तरायण का संदेश

 उत्तरायण का संदेश


          @मानव

पर्व,अनुष्ठान भारत की 

जनसंस्कृति के आधार स्तंभ हैं;

हमारे पर्व

ऊर्जा एवं दिव्यता का

संचार करने वाले हैं।


उत्तरायण को सकारात्मकता

एवं आध्यात्मिक

ज्ञान रूपी प्रकाश का

प्रतीक माना गया है

तथा दक्षिणायन मार्ग को 

नकारात्मकता का।


मकर संक्रांति के मंगल पर्व से ही

सूर्य की उत्तरायण गति 

प्रारंभ होती है;

इस दिन सूर्य

मकर राशि में प्रवेश करता है।


उत्तरायण नव स्फूर्ति, 

प्रकाश और ज्ञान के साथ 

जोड़ा जाता है;

सूर्य के उत्तरायण की ओर जाने से

प्रकृति भी परिवर्तित होती है।


इस दिन से ही सूर्य

उत्तरी गोलार्ध में

आना शुरू होता है, 

फलस्वरूप रात छोटी

तथा दिन बड़े होने लगते हैं। 


इस प्रकार यह उत्तरायण

हमें अंधकार से प्रकाश की ओर

जाने को प्रेरित करता है; 

समस्त जीवधारी प्रकाश चाहते हैं।


भौतिक प्रकाश

एवं आध्यात्मिक प्रकाश से ही

प्राणियों में नई ऊर्जा का 

संचार होता है।


प्रकाश ज्ञान का प्रतीक है 

प्रकाश अधिक होने से 

प्राणियों की चेतनता

एवं कार्य शक्ति में वृद्धि होती है।


मकर संक्रांति के पावन अवसर पर

सूर्य का उत्तरायण मार्गी होना

हमें सुषुप्ति से जागृति की ओर

बढ़ने का दिव्य संदेश देता है।


उत्तरायण दिव्य शक्तियों

एवं सात्विक प्रवृत्तियों को 

जगाने की उत्तम बेला है;

उत्तरायण मार्ग के प्रारंभ होने से

इस भूलोक पर भी 

आध्यात्मिक शक्तियों का 

समावेश हो जाता है। 


उत्तरायण के पावन अवसर पर

शरीर त्यागने वाले

मोक्ष की प्रप्ति करते हैं।


"उत्तरायण मार्ग

नव स्फूर्ति,आध्यात्मिक ऊर्जा

एवं मुक्ति प्रदाता है।"

    (योगेश्वर श्रीकृष्ण)

यह सकारात्मक परिवर्तनों का

आरंभ बिंदु है।

✍️मनोज श्रीवास्तव


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