मन का सँगम

 मन का सँगम


               @मानव

सँपूर्ण भारत ही तीर्थ है, 

लेकिन जहाँ जल हो, 

अक्षयता हो,

वहीं तीर्थ है,

चाहे सरिता के रूप में हो

या सरोवर के रूप में।


प्रयागराज

सिर्फ पावन नदियों का सँगम नहीं,

बल्कि सम्पूर्ण विश्व को एक करने

और मिलाने की भूमि है;

यहाँ का हर घर तीर्थ है।


यहाँ भिन्न-भिन्न विचारधाराओं

और सँस्कृतियों का मेल 

अनुकरणीय है,

जो दुनिया के साथ

समन्वय की भूमिका का 

अहम केंद्र भी है।


सँगम तट पर कुम्भ से

सबको जोड़ने की परंपरा रही है;

यह विश्व को सँगम तट पर 

एक करने का कुम्भ है,

जो दुनिया के एकजुट होने का

महापर्व भी है।


प्रयागराज की भूमि ने 

अगाध वैचारिक सँगम

विश्व को दिया है,

यहाँ परस्पर विरोधी होते हुए भी,

सँगम की भूमि पर

एक साथ स्नान करते हैं

तीर्थराज सबको मिलाता है।  


कुम्भ यानी अमृत कलश;

कुम्भ शगुन का भी होता है;

कुम्भ बाहर से कठोर,

अंदर से खाली भी होता है।


वेदांत में कुम्भ

घटाकाश के रूप में

यानी हृदय एक कुम्भ है;

कुम्भ एक राशि भी है;

कुम्भ के भावों में गङ्गा

और शिव समाहित हैं। 


तीर्थराज निर्वाण की भूमि है,

यहाँ आने वालों को

वह सब कुछ मिल सकता है,

जिसे वह पाना चाहते हैं। 


कुम्भ में अर्थ,धर्म,काम,मोक्ष 

चारों पदार्थों के भण्डार

स्वतः खुल जाते हैं,

कल्पवासियों को यह खजाना

सहज प्राप्त हो जाता है। 


त्रिवेणी तट पर

मन के सारे विकार

और क्लेश भी मिट जाते हैं,

इस सँगम में हर समस्या का 

समाधान निहित है।


अक्षयवट छत्र है,

तीर्थराज प्रयागराज का!

जिस पर हर सनानती को 

गर्व होना चाहिए,

क्योंकि अपने धर्म में 

अखण्ड,अनंत विश्वास ही 

अक्षयवट है।


अक्षय का अर्थ

अखण्ड,अनंत या शाश्वत है, 

जबकि वट विश्वास का प्रतीक है;

हमारी सनातन परंपरा में 

जिसके प्रति अटल विश्वास है,

वही अक्षयवट है।


प्रयागराज में ज्ञानरूपी 

अनादि काल से अक्षयवट की जड़ें

साक्षात तीर्थ के रूप में 

विराजमान हैं;

अक्षयवट अनादि काल से 

तीर्थ रूप में विराजमान है।


अपने समृद्ध इतिहास

और महत्व के साथ, 

आध्यात्मिक विभूतियों के लिए

एक साथ आने

और सनातन धर्म के

स्थायी मूल्यों की पुष्टि हेतु

एक आदर्श मंच

कुम्भ प्रदान करता है। 


सनातन की पवित्रता की रक्षा

और सँरक्षण के लिए 

सामूहिक विचार

कुम्भ में सहज रूप से सँभव है।


सनातन धर्म से जुड़ी

विभिन्न चुनौतियों

और भ्रांतियों पर चिंतन 

और हल के लिए कुम्भ

एक श्रेष्ठ अवसर भी है।


 ✒️मनोज श्रीवास्तव

Comments

Popular posts from this blog

भगवान के सन्देशवाहक

वट वृक्ष की शरण

मेवाड़ का सूर्य