मानवता का महामिलन
मानवता का महामिलन
@मानव
महाकुम्भ
केवल एक महाउत्सव नहीं,
बल्कि सनातन संस्कृति की
दिव्य धारा है,
जहाँ आस्था,श्रद्धा
और अध्यात्म का
पवित्र सँगम होता है।
महाकुम्भ
सँपूर्ण मानवता का महामिलन है;
यह भारतीय सनातन की
अद्भुत विविधता,
उसकी सांस्कृतिक समृद्धि
और आध्यात्मिक गांभीर्य का
जीवंत उदाहरण है।
महाकुम्भ
हिंदू आस्था,
हिंदू अस्मिता
और हिंदू आत्मगौरव का संकेत है;
यह हिंदू समाज की
पद्सोपानीय संरचना से
उपजे जातीय विभाजन को
लाँघने की शुरुआत है।
महाकुम्भ
विविधता में एकता के कथ्य को
रेखाँकित करता है;
जो हिंदू समाज में
बढ़ते विखण्डन पर
विराम की बानगी है।
यह अपनी धार्मिक
साँस्कृतिक धरोहरों की
वैश्विक स्तर पर
समुचित 'मार्केटिंग' का
अप्रतिम प्रतिमान है।
महाकुम्भ से निकले संकेतों में
अध्यात्म,संस्कृति,
राजनीति,अर्थव्यवस्था
और प्रबंधकीय कौशल के
महत्वपूर्ण सँदेश गुम्फित हैं।
माँ गङ्गा में एक डुबकी से
हृदय निर्मल हो जाता है
और मोक्ष की
अनुभूति होती है
कुम्भ स्नान के सौभाग्य से
मन आनंदित होता है,
आत्मा तृप्त होता है।
महाकुम्भ
भारतीय संस्कृति की भव्यता
और सनातन परंपराओं की
अखण्डता का प्रतीक है।
यह आस्था
और आत्मिक शुद्धि का पर्व है,
जहाँ समस्त सनातनी एकत्र होकर
पुण्य लाभ अर्जित करते हैं।
हर हर गंगे !
✒️मनोज श्रीवास्तव

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