रामकथा जननी प्रयाग
रामकथा जननी प्रयाग
@मानव
"राम विराजमान हो गए,
राम विवाद नहीं,संवाद हैं;
राम इस देश का
समाधान हैं,
विजय नहीं,
विनय हैं।"
प्रयागराज की धरा
रामकथा जननी है।
अयोध्या से वनवास के लिए
जाते समय भगवान राम का
पहला पड़ाव किसी राजा
या धनवान के यहाँ नहीं था,
चुना तो प्रयाग में
गङ्गा नदी किनारे पावन तट
श्रृंगवेरपुर धाम को।
पहली बार मिले
तो समाज के सबसे अंतिम व्यक्ति
केवट से!
भरत ने भी राजपाट नहीं माँगा,
धनधान्य नहीं चाहा;
केवल राम के चरणों में
अनुरक्ति माँगी।
राम शबरी के पास
स्वयं जाते हैं;
घायल गिद्ध (जटायु) का सिर
अपनी गोद में रख लेते हैं;
यही समाज की समरसता है;
यह गतिविधियाँ
रामराज्य के प्रथम नागरिक की
भूमिका का दर्शन कराती हैं।
✒️मनोज श्रीवास्तव

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