रङ्ग की ओर

रङ्ग की ओर


              @मानव

हमारे त्योहार

सिर्फ देखकर

आनंद उठाने के लिए नहीं

बल्कि उसमें बराबरी से भाग लेकर 

समरस होने के लिए होते हैं।


भारतीय संस्कृति में त्योहार 

हमारे सामाजिक जीवन में 

ऊर्जा का सँचरण करने में 

उत्प्रेरक की भूमिका निभाते हैं।


हमारी सँस्कृति में

त्योहार का अर्थ है

सबके साथ उत्सव की 

खुशियाँ बाँटना;

जो समर्थ हैं उनके साथ 

अपने सुख-दुख साझा करना

और जो समर्थ नहीं हैं,

उन्हें सहारा देकर

उनके जीवन का उल्लास बढ़ाना।


फागुन के महीने को

रङ्गों से सराबोर करता

होली का त्योहार

अपनी बहुरंगी आभा

और विविधवर्णी मादकता से

पूरे वातावरण को

उल्लासित कर देता है।


यह त्योहार जीवन की 

उदासीनता और मलिनता को

दूर करते हुए

ऊर्जा के नए स्फुरण का

संचार करता है।


पर्व न सिर्फ हमारे दैनंदिन जीवन की

एकरसता को भंग करते हैं 

बल्कि हमें जीवन जीने की 

एक नई प्रेरणा

और दृष्टि देते हैं।


त्योहारों पर परिवार के 

सदस्यों का मिलन,

उल्लास और उमंग का वर्णन,

इसी की पराकाष्ठा है-

होली का त्योहार।


कालमान के अनुसार पद्धति बदली,

लेकिन त्योहार का मूल चरित्र

वैसे ही बना रहा,

यह सुअवसर है

मन की मलिनता धोने का

और सबके बीच सौहार्द्रपूर्ण 

वातावरण की निर्मिति का।


होलिका दहन के माध्यम से 

हम सँकल्प लेते हैं

अपनी सारी बुराइयों

और मन के कलुष को

भस्म करने का;

साथ ही स्वागत करते हैं

नई फसल का।


भावनाओं का

यह एक ऐसा सम्मिश्रण है

जो सिर्फ भारतीय परंपरा में ही

देखने को मिल सकता है।


धूलिवंदन के साथ

खेला जाने वाला

रङ्गों का त्योहार होली

रङ्गों की आभा के साथ 

सबको एक रङ्ग में रंगने का 

अवसर देता है। 


अमीर-गरीब,ऊँच-नीच,छोटा-बड़ा,

सभी तरह के भेद मिट जाते हैं,

सब एक रङ्ग में आ जाते हैं;

यह आपसी मतभेद, 

बैरभाव,कलुष,मलिनता

सब मिटा देने का त्योहार है। 


यह नए सिरे से

नई ऊर्जा,नई उमंग से 

जीवन को फिर से

शुरू करने का त्योहार है।


उत्साह,उल्लास व उमंग वाला

होली त्यौहार

जीवन को नई ऊर्जा से भर देता है

और नए विहान की ओर

अग्रसारित करता है।


 ✒️मनोज श्रीवास्तव

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