शीतला सप्तमी

 शीतला सप्तमी


             @मानव    

माता शीतला

स्वच्छता की

अधिष्ठात्री देवी हैं,

उनकी उपासना स्वच्छता 

और पर्यावरण सुरक्षा की

प्रेरणा देने के कारण

सर्वथा प्रासंगिक है।


शीत-ग्रीष्म के सन्धिकाल में

जब हम संक्रमण

और बीमारियों से बचने के लिए

अधिक सावधान रहते हैं,

माता शीतला का संदेश

हमें अपने आसपास की 

स्वच्छता बनाए रखने

और पर्यावरण का ध्यान रखना

आवश्यक बताता है;

वे हमारे जीवन में

स्वच्छता और स्वास्थ्य का

सन्देश देती हैं।


माता शीतला का वाहन गर्दभ है;

वे अपने हाथों में कलश, 

सूप,

मार्जन (झाडू)

तथा नीम के पत्ते धारण करती हैं।

  (स्कंद पुराण)


सँक्रामक रोगों में

नीम के पत्ते उपयोगी हैं

तो सूप और झाड़ू

स्वच्छता का प्रतीक हैं।


मान्यता है

कि शीतला देवी के आशीर्वाद से

परिवार में रोगों का

निवारण होता है।


इनकी अर्चना का स्तोत्र

स्कंद पुराण में शीतलाष्टक

शीतला देवी की महिमा का 

गान करता है

और उनकी उपासना के लिए

भक्तों को प्रेरित भी करता है;

मान्यता है कि इसकी रचना 

भगवान शंकर ने की थी। 


माता शीतला की पूजा का उद्देश्य

शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार लाना

और अपनी दैनिक जीवनशैली में

स्वच्छता और सादगी को 

अपनाने का सन्देश है,

ताकि शारीरिक,मानसिक

और सामाजिक रूप से

हम स्वस्थ और सुखी रहें। 


वन्देऽहंशीतलांदेवीं 

रासभस्थां दिगम्बरः, 

मार्जनीकलशोपेतां 

सूर्पालंकृतमस्तकाः।


 ✍️मनोज श्रीवास्तव

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