शक्ति उपासना
शक्ति उपासना
@मानव
मनुष्य चेतना शक्ति के रूप में
जीवन जीता है,
मन होने के कारण ही
मानव मनुष्य कहलाता है,
जो अन्य जीवों को नहीं मिलती।
जो मन को सशक्त नहीं बनाते,
वे संसार में बोझ बनकर रहते हैं
और मनुष्य रूप में भी
पशुओं की तरह जीते हैं।
(चाणक्य नीति)
व्रत-उपवास के लिए
चैत्र नवरात्र उपयुक्त है;
सामान्य रूप से
ऋतु परिवर्तन के समय
व्रत-उपवास के जरिये
ब्रह्माण्ड में व्याप्त शक्तियों को
संचित करने का विधान है।
नवरात्रि के दौरान
चेतना शक्ति,बुद्धि,निद्रा,
शाँति,काँति,लक्ष्मी,स्मृति
तथा मातृ शक्ति आदि
अनेकानेक शक्तियों की
कृपा की कामना की जाती है।
शक्ति कृपा प्राप्त कर मनुष्य
आत्मा एवं मन की शक्ति से
परिपूर्ण होता है;
मन यदि कमजोर होता है
तो भौतिक शक्तियाँ व्यर्थ लगती हैं।
अतः नवरात्र पर्व पर
पूरे विधि-विधान से व्रत
प्रकृति रूपी दुर्गा से
शक्ति अर्जित करने का प्रयास है।
✒️मनोज श्रीवास्तव

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