नवदुर्गा दर्शन

 नवदुर्गा दर्शन


               @मानव

देवी की नौ मूर्तियाँ हैं

जिन्हें नवदुर्गा कहते हैं

उनके पृथक पृथक नाम 

बताए जाते हैं।


प्रथम नाम शैलपुत्री का है,

देवी शैलपुत्री

गिरिराज हिमालय की पुत्री 

'पार्वतीदेवी' हैं;

यद्यपि ये सबकी अधीश्वरी हैं,

तथापि हिमालय की तपस्या 

और प्रार्थना से प्रसन्न हो 

कृपापूर्वक

उनकी पुत्री के रूप में प्रकट हुईं।


ब्रह्म चारयितुं शीलं

यस्याः सा ब्रह्मचारिणी;

सच्चिदानन्दमय 

ब्रह्मस्वरूप की प्राप्ति कराना

जिनका स्वभाव हो,

वे 'ब्रह्मचारिणी' हैं।


चन्द्रः घण्टायां यस्याः 

सा-आह्लादकारी

चन्द्रमा जिनकी घण्टा में स्थित हों,

उन देवी का नाम 'चन्द्रघण्टा' है।


कुत्सितः ऊष्मा कूष्मा- 

त्रिविधतापयुतः संसारः,

स अण्डे मांसपेश्यामुदररूपायां 

यस्याः सा कूष्माण्डा।

अर्थात् त्रिविध तापयुक्त संसार

जिनके उदर में स्थित है,

वे भगवती 'कूष्माण्डा'  हैं। 


भगवती की शक्तिसे उत्पन्न हुए

सनत्कुमार का नाम स्कन्द है;

उनकी माता होने से

वे 'स्कन्दमाता' कहलाती हैं।

  (छान्दोग्यश्रुति)


देवताओं का कार्य

सिद्ध करने के लिये देवी 

महर्षि कात्यायन के 

आश्रमपर प्रकट हुईं 

और महर्षि ने उन्हें

अपनी कन्या माना;

इसलिये 'कात्यायनी' नाम से 

उनकी प्रसिद्धि हुई ।


सबको मारने वाले

काल की भी रात्रि 

यानी विनाशिका होने से

उनका नाम 'कालरात्रि' है। 


इन्होंने तपस्या द्वारा

महान् गौरवर्ण प्राप्त किया था,

अतः अप्रतिम सौंदर्य अधिष्ठात्री

ये देवी महागौरी कहलायीं। 


सिद्धि अर्थात्

मोक्ष को देने वाली होने से 

उनका नाम 'सिद्धिदात्री' है

जो जन्म जन्मान्तर को

सिद्धि प्रदाता है।


दुर्गा  देवी के समस्त रूप

जन - जन को

देव सायुज्य प्रदान कर

मोक्ष प्रदान करने में

सहायक बनते हैं।


(श्री दुर्गासप्तशती से)

✒️मनोज श्रीवास्तव

Comments

Popular posts from this blog

भगवान के सन्देशवाहक

वट वृक्ष की शरण

मेवाड़ का सूर्य