धन्न गुरु तेग बहादुर
प्रकाश पर्व पर,
धन्न गुरु तेग बहादुर
@मानव
नवम गुरु तेग बहादुर जी का
भारतीय चिंतन धारा में
अपना मौलिक योगदान है;
उन्हें नमन करने का अर्थ है
भारतीय अध्यात्म-चिंतन पर
विचार करना।
गुरु तेग बहादुर जी ने
औरंगजेब के समय
धर्मांतरण की लहर को
अपने बलिदान के द्वारा
केवल रोका ही नहीं,
बल्कि एशिया के देशों के सामने
भारतीय अध्यात्म का
नया अध्याय खोला।
गुरु तेग बहादुर जी का
अवदान
उनकी शाश्वत जीवन-दृष्टि में
निहित है।
गुरु तेग बहादुर जी की दृष्टि
केवल एक भूखण्ड पर
केंद्रित नहीं थी,
वे पूरी सृष्टि की व्यथा को
आत्मसात कर
मानवीय दुख-दर्द को
हर लेना चाहते थे।
वे भारत के जन-जीवन को
गुरमत दर्शन के माध्यम से
नई चेतना देते है;
सँपूर्ण मानवता में
आत्मबल का
शाश्वत सँचार करना ही
उनका परम लक्ष्य था।
गुरु जी की वाणी में
प्रकृति के मानवीकरण सँग,
अध्यात्मीकरण भी
विलक्षित होता है।
गुरु जी द्वारा प्रस्तुत चिंतन
भक्ति के स्वर को
शक्ति के माध्यम से भी
प्रस्तुत करने की प्रक्रिया में
सफल होता है।
खालसा की सर्जना
गुरु गोबिंद सिंह जी का
भक्ति और शक्ति का नव सँकल्प
गुरु तेग बहादुर की विरासत का ही
अखण्ड हिस्सा है।
✒️मनोज श्रीवास्तव

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