देवी के विविध नाम
देवी के विविध नाम
@मानव
चण्डिका देवी को नमन है!
जयति सर्वोत्कर्षेण वर्तते
इति 'जयन्ती'
क्योंकि माँ सबसे उत्कृष्ट
एवं विजयशालिनी हैं।
मङ्ग जननमरणादिरूपं
सर्पणं भक्तानां लाति
गृह्णाति नाशयति
या सा मङ्गला मोक्षप्रदा;
जो अपने भक्तों के
जन्म-मरण आदि
संसार-बन्धन को दूर करती हैं,
उन मोक्षदायिनी मंगलमयी
देवी का नाम 'मंगला' है।
कलयति भक्षयति प्रलयकाले
सर्वम् इति काली;
जो प्रलयकाल में
सम्पूर्ण सृष्टि को
अपना ग्रास बना लेती है;
वह 'काली' है।
भद्रं मङ्गलं सुखं वा
कलयति स्वीकरोति
भक्तेभ्यो दातुम् इति
भद्रकाली सुखप्रदा;
जो अपने भक्तों को
देने के लिये ही
भद्र सुख किंवा मंगल
स्वीकार करती है,
वह 'भद्रकाली' है।
हाथ में कपाल
तथा गले में मुण्डमाला
धारण करने वाली ही
"कपालिनी" है।
दुःखेन अष्टाङ्गयोग
कर्मोपासनारूपेण
क्लेशेन गम्यते प्राप्यते
या सा दुर्गा"
जो अष्टांगयोग,
कर्म एवं उपासनारूप
दुःसाध्य साधन से प्राप्त होती हैं,
वे जगदम्बिका
'दुर्गा' कहलाती हैं।
क्षमते सहते भक्तानाम्
अन्येषां वा सर्वानपराधान्
जननीत्वेनातिशय
करुणामयस्वभावादिति क्षमा;
सम्पूर्ण जगत् की जननी होने से
अत्यन्त करुणामय स्वभाव
होने के कारण
जो भक्तों अथवा दूसरों के भी
सारे अपराध क्षमा करती हैं,
उनका नाम 'क्षमा' है।
सबका शिव
अर्थात् कल्याण करने वाली
देवि जगदम्बा को
'शिवा' कहते हैं।
सम्पूर्ण प्रपंच को
धारण करने के कारण
भगवती का नाम
'धात्री' है।
स्वाहारूप से
यज्ञभाग ग्रहण करके
देवताओं का पोषण करने वाली
"स्वाहा" हैं।
स्वधा रूप से श्राद्ध
और तर्पण को स्वीकार करके
पितरों का पोषण करने वाली
"स्वधा" हैं।
देवी के विविध नाम
काम-क्रोध शत्रुओं का नाश कर
हमें रूप,जय,यश की प्रदाता
व हमारा कल्याण करने वाले हैं।
(श्रीदुर्गासप्तशती से)
✍️मनोज श्रीवास्तव

Comments
Post a Comment