धरती माँ
विश्व पृथ्वी दिवस पर
धरती माँ
@मानव
पृथ्वी सूर्य की परिक्रमा करता
एक खगोलीय पिंड भर नहीं
यह अनेक रहस्यों से परिपूर्ण
ऐसी दैविक अस्मिता है,
जो आदिकाल से मनुष्य
और वनस्पतियों सहित
समस्त जीव-जंतुओं के
भरण-पोषण के साधन
सुलभ कराती रही है।
माँ की भूमिका निभाती
परम आश्रयदात्री पृथ्वी
देवी स्वरूप आराध्य है;
पृथ्वी के प्रति श्रद्धाभाव
और उसकी अर्चना-स्तुति की प्रथा
सभी पंथों में विद्यमान है।
विश्व की प्रथम चिकित्सक
और उपचार प्रदाता के रूप में
पृथ्वी का स्थान सर्वोपरि है;
सभी औषधियाँ उन्हीं के
उद्यान की अङ्ग हैं।
आदि समाजों को
तन-मन से पृथ्वी से
सतत जुड़ाव सुहाता था;
हर दृष्टि से पृथ्वी से
उनका सान्निध्य बना रहता,
जो उन्हें तन,मन,चित्त से
स्वस्थ और सकारात्मक
बनाए रखता।
भवनों के निर्माण से पूर्व
भूमि पूजन की परंपरा है।
निर्माण कार्य में खोदाई से
पृथ्वी के आहत होने पर
क्षमा याचना के साथ
भवन को अनिष्टों,बाधाओं से
मुक्ति की प्रार्थना की जाती है।
धरती माँ से भरपूर खाद्यान्न
प्राप्ति की आशा से
खेती में बोआई से पूर्व
भूमि पूजन की परिपाटी है।
हमें सदा ध्यान रखना होगा
कि हम पृथ्वी के कारण हैं,
पृथ्वी हमारे कारण नहीं है;
हमें इसका स्वामी नहीं,
सेवक एवं सँरक्षक बनना है।
धरती माँ दयालु हैं;
कुकृत्यों के उपरांत भी
शरणागत असुरों का
उन्होंने उद्धार किया,
'हमारा भी करेंगी;
केवल हम उनके प्रति
श्रद्धाभाव रखते हुए
अनुकूल कार्य करें।
वैज्ञानिक प्रयासों का लोहा
तब माना जाएगा
जब प्रयोगशाला में घास का
एक तिनका निर्मित कर डाला जाए।
(थामस एल्वा एडीसन)
✒️मनोज श्रीवास्तव

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