आत्मोत्थान पर्व

 आत्मोत्थान पर्व


              @मानव

चैत्र नवरात्र

देवी भगवती की उपासना से

आत्मिक शक्ति,

मानसिक शाँति

और शारीरिक स्वास्थ्य बढ़ाने का

एक अलभ्य अवसर है।


इस कालखण्ड में 

आहार-विहार का संयम 

व्यक्ति की

रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने

और आंतरिक शक्तियों को 

जाग्रत करने का

कार्य करता है।


देवी दुर्गा इच्छा,ज्ञान

और क्रिया शक्ति की प्रतीक हैं;

वे सँपूर्ण ब्रह्माण्ड की आधारभूत

और क्रियात्मक शक्ति के रूप में

आराधित होती हैं।


माँ की उपासना से

भक्तों को आत्मिक बल, 

जीवन में संतुलन

और आध्यात्मिक उन्नति 

प्राप्त होती है।


नवरात्र के नौ दिनों में

किया गया तप और साधना 

व्यक्ति को सभी प्रकार की 

नकारात्मक शक्तियों से मुक्त कर

कल्याणकारी जीवन की ओर

प्रेरित करता है।


नवरात्र का कालखण्ड 

निस्संदेह आत्मिक उत्थान 

और व्यक्तिगत विकास के लिए

अत्यंत उपयोगी सिद्ध होता है!


मानव मन में अंतर्निहित 

दुष्प्रवृत्तियों का निर्मूलन

माँ की कृपा

अर्थात् निर्मल मति

और आत्म-शक्ति के 

जागरण से सँभव है। 


अंतःकरण की पूर्ण शुचिता से

प्रस्फुटित "शुभता और दिव्यता" ही

शक्ति आराधना की 

फलश्रुति है।


इच्छा शक्ति,ज्ञान शक्ति

और क्रिया शक्ति के रूप में 

जो सचराचर जगत में विद्यमान हैं,

उन माँ की आराधना का

यह पवित्र पर्व नवरात्र

सभी के लिए मंगलमय हो।


    ✒️मनोज श्रीवास्तव

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