स्वर्ण संस्कृति
अक्षय तृतीया पर
स्वर्ण संस्कृति
@मानव
भारतीय संस्कृति में स्वर्ण
केवल बहुमूल्य धातु नहीं
बल्कि धर्म,परंपरा
और पारस्परिक प्रेम को
परिभाषित करने वाला तत्व है।
सोना कोई आम धातु नहीं,
भारतीय लोकमानस के अंतर्मन में
इसकी मंगल उपस्थिति है;
इसका दान व संग्रहण दोनों ही
एक आम भारतीय परिवार की
जीवनशैली और विचार में व्याप्त है।
इसकी पवित्रता
और शुद्धता का ही महत्व है
कि इष्ट प्रभु के विग्रह स्वरूप को
हम स्वर्ण आभूषण-अलंकरण से
सुसज्जित देखते हैं।
वेदों में 'हिरण्य'
हमें धन,समृद्धि
और दिव्यता से जोड़ता है;
ऋग्वेद में देवताओं के
वस्त्र,कवचऔर आभूषण
स्वर्ण जड़ित वर्णित हैं।
सनातन सँस्कृति में
सोने की पूजा की जाती है;
मंदिरों में भेंट चढ़ाया जाता हैं;
पंडित को दान दिया जाता है;
इस श्रद्धा भाव के कारण
कमर के नीचे अधारणीय भी है।
हमारी संस्कृति में
स्वर्ण के प्रति पूज्य भाव है
स्वर्ण सुसज्जित स्त्री
लक्ष्मी का स्वरूप है;
स्त्री का स्वर्ण
उसका अपना 'स्त्री धन' है।
कैसी भी हैसियत हो,
अपनी बिटिया को
सोने के गहने
आशीर्वाद-स्वरूप देना
व नववधु का स्वागत
स्वर्ण आभूषणों से करना
हर अभिभावक का धर्म है;
क्योंकि लोक मन सोने को
साक्षात् लक्ष्मी मानता है।
भारतीय सँस्कृति में सोना
पूज्य है,शुद्ध है,पवित्र है
और स्थायित्व का प्रतीक है;
कञ्चन धन प्रदान करता है,
इससे बढ़ कोई प्रिय वस्तु नहीं;
'कञ्चन स्वर्णमयं दीनं,
नास्त्यस्यापरम प्रियम्'।
(अथर्ववेद)
सबसे शुद्ध धातु होने के कारण
स्वर्ण पवित्रता
और दिव्यता का प्रतीक है;
स्वर्ण का उपयोग
यज्ञों में भी किया जाता था;
शिवलिंग निर्माण में
सोने के उपयोग का उल्लेख है।
(शिवपुराण)
हजारों सालों से
इस चमकदार पीली धातु को
धन,शक्ति और प्रतिष्ठा का
प्रतीक माना जाता रहा है।
भारत में अकूत सँपदा थी,
अथाह सोना था
जिससे यह
सोने की चिड़िया कहलाता था।
इस स्वर्ण का आकर्षण ही था
जिससे विदेशी आक्रांताओं ने
बारम्बार भारत पर
आक्रमण कर लूटपाट की;
आज भी घर-घर में उपस्थित
भारत का अदृश्य स्वर्ण भण्डार
इसका मजबूत पक्ष है।
सोना भारत की सँस्कृति ही नहीं,
आर्थिकी का भी महत्वपूर्ण हिस्सा है;
इसमें निवेश बेहतर विकल्प है
क्योंकि इसका मूल्य बढ़ता ही है,
घटता कभी नहीं ।
भारतीयों के लिए सोना
एक धातु से कहीं ज्यादा
हमारी मान्यताओं
और परंपराओं का हिस्सा है।
मान्यता है कि सोने को
कभी त्यागा नहीं जाता,
पुराना सोना सँग्रह के लिए है
बेचने के लिए नहीं।
विश्व में आर्थिकी
कितनी भी डगमगाए,
कैसी भी मंदी आए,
सोने के सँग्रहण की प्रवृत्ति
भारत का सबसे सशक्त
आर्थिकी मेरुदण्ड है।
✒️मनोज श्रीवास्तव

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