नवरात्र पर्व
नवरात्र पर्व
@मानव
देवी माँ दुर्गा का हर रूप
एक अद्वितीय गुण
या शक्ति का
प्रतिनिधित्व करता है।
शैलपुत्री
शक्ति और स्थिरता का
प्रतिनिधित्व करती हैं;
तो ब्रह्मचारिणी
तपस्या का प्रतीक हैं
और सिद्धिदात्री
परम तृप्ति
और ज्ञान प्रदायिनी हैं।
आदिशक्ति
या आदि पराशक्ति
या महादेवी माँ दुर्गा को
सनातन,
निराकार,
परब्रह्म,
ब्रह्माण्ड से भी परे
एक सर्वोच्च शक्ति है।
शाक्त संप्रदाय में
यह शक्ति मूल रूप में
निर्गुण है,
परंतु निराकार परमेश्वर
जो न स्त्री है न पुरुष,
उसे जब सृष्टि की
रचना करनी होती है;
वे आदि पराशक्ति के रूप में
उस इच्छा रूप में
ब्रह्माण्ड की रचना,
जननी रूप में
सँसार का पालन
और क्रिया रूप में
पूरे ब्रह्माण्ड को गति
तथा बल प्रदान करते हैं।
नवरात्र
माँ के अलग-अलग रूप के
अवलोकन करने का
दिव्य पर्व है;
और नवरात्र काल
आहार की शुद्धि के साथ
मंत्र की उपासना का काल है।
नवरात्र में किए गए प्रयास,
शुभ-संकल्प बल के सहारे
देवी दुर्गा की कृपा से
सफल होते हैं।
नवरात्र पर हम
काम,क्रोध,मद,मत्सर,लोभ आदि
राक्षसी प्रवृत्तियों का हनन कर
विजय का उत्सव मनाते हैं।
थकावट से मुक्त होने के लिए
इन नौ दिनों में
शरीर की शुद्धि,
मन की शुद्धि
और बुद्धि में शुद्धि आ जाए,
सत्व शुद्धि हो जाए;
इस तरह के शुद्धीकरण करने का,
पवित्र होने का पर्व है
यह नवरात्र!
नवरात्र का उत्सव
बुराइयों से दूर रहने का प्रतीक है,
यह लोगों को जीवन में
उचित एवं पवित्र कार्य करने
और सदाचार अपनाने के लिए
प्रेरित करता है।
इस पर्व पर सकारात्मक दिशा में
कार्य करने पर मंथन हो,
ताकि समाज में सद्भाव के
वातावरण का निर्माण हो सके।
सँपूर्ण ब्रह्माण्ड
तरङ्गों से भरा हुआ है।
मंत्र के माध्यम से
उन तरङ्गों को,
जो शक्ति और सामर्थ्य के रूप में
बिखरी हुई है,
उन्हें आकर्षित किया जा सकता है।
इस काल की तरंगें
बहुत सामर्थवान हैं,
उनके साथ एकीकृत होकर
हम अप्रत्याशित परिणाम
प्राप्त कर सकते हैं।
अतः मंत्र वातावरण से
सकारात्मक ऊर्जा को
अवशोषित कर
हमारे पास लाते हैं
और नकारात्मक ऊर्जा
दूर करते हैं।
देवी दुर्गा के नौ स्वरूपों की
आराधना का यह पर्व
हमें मातृशक्ति की उपासना
तथा सम्मान की प्रेरणा देता है।
समाज में नारी के महत्त्व को
प्रदर्शित करने वाला यह पर्व
हमारी संस्कृति
एवं परंपरा का प्रतीक है।
नारी इस सृष्टि और प्रकृति की
‘जननी’ है;
नारी के बिना
सृष्टि की कल्पना भी
नहीं की जा सकती।
जीवन के सकल भ्रम,भय,अज्ञान
और अल्पता का भञ्जन
एवं अंतःकरण के
चिर-स्थायी समाधान करने में
नारी ही समर्थ है।
विश्वजननी कल्याणी
राजराजेश्वरी पराशक्ति
श्री माँ दुर्गाजी की उपासना का
यह दिव्य पर्व चैत्र नवरात्र
आत्मोत्थान का महापर्व है।
✒️मनोज श्रीवास्तव

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