शिव!
शिव!
@मानव
शिव परोकारी हैं,
परमानन्द हैं।
शिव भगवंत हैं,
ओंकार हैं।
शिव ब्रह्म हैं,
शिव धर्म हैं।
शिव शक्ति हैं,
शिव भक्ति हैं।
शिव सृष्टि के नियामक हैं
इसीलिए महादेव कहलाते हैं।
जहाँ धर्म है
वहाँ शिव हैं;
शिव ही शाँतिदाता हैं।
(यजुर्वेद)
शिवलिंग भगवान शिव की
निराकार और साकार
प्रकृति को दर्शाता है।
शिव के साधक को
मृत्यु,रोग और शोक का
भय नहीं होता।
शिवलिंग का अर्थ है
शिव यानी परमपुरुष का
प्रकृति के समन्वित चिह्न।
भगवान शिव का रूप-स्वरूप
जितना विचित्र है,
उतना ही आकर्षक भी।
इनकी जटाएँ अँतरिक्ष
व चंद्रमा मन का प्रतीक है।
इनकी तीन आँखें हैं,
इसीलिए इन्हें
त्रिलोचन भी कहते हैं।
ये आँखें सत्व,रज,तम
(तीन गुणों),
भूत,वर्तमान,भविष्य
(तीन कालों),
स्वर्ग,मृत्यु,पाताल
(तीनों लोकों)
का प्रतीक हैं।
सर्प जैसा हिंसक जीव
शिव के अधीन हैं।
इनका त्रिशूल
भौतिक,दैविक,
और आध्यात्मिक तापों को
नष्ट करता है।
डमरू का नाद ही
ब्रह्मा स्वरूप है।
शिव के गले की मुण्डमाला
मृत्यु को वश में करने का
संदेश देती है।
चार पैर वाले जानवर की
सवारी करके महादेव
संदेश देते हैं कि
धर्म,अर्थ,काम और मोक्ष
उनकी कृपा से मिलते हैं।
✍️मनोज श्रीवास्तव

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