भोलेनाथ

 भोलेनाथ


              @मानव

भगवान शिव

शक्ति का स्वरूप हैं।


शिव में सनातन संस्कृति का 

दर्शन समाहित है।


शिव चेतना की

समस्त अवस्थाओं से ऊपर हैं।


शिव की चेतना की अवस्था 

समाधि है।


जब व्यक्ति व जीव के अंदर 

ईश्वर देखने की इच्छा

जाग्रत होती है

तो वह समाधि लेता है;

समाधि की परम अवस्था को

शिवत्व कहते हैं।


शिवलिंग की पूजा

निराकार से साकार को 

पाने का सशक्त माध्यम है। 


शिवलिंग पंचमहाभूत-

पृथ्वी,जल,अग्नि,वायु

और आकाश का प्रतीक है।


शिव पूजन नहीं,

बल्कि दर्शन के पर्याय हैं,

अतः वह सबसे अलग हैं। 


वे वैद्यनाथ

यानी चिकित्सा के गुरु, 

नटराज

यानी नृत्य के गुरु, 

आदियोगी

यानी योग के गुरु हैं।


प्रभु श्रीराम के गुरु शिव हैं;

जो रामेश्वरम् में स्वयं

श्रीराम द्वारा शिवलिंग रूप में

पूजित हुए।


शिव ओंकार भी हैं

और संहारक भी।


भगवान शिव भोलेनाथ हैं 

जो भक्तों के भाव से

प्रसन्न हो जाते हैं।


जब परिस्थिति विपरीत होती है

उस समय रौद्र रूप धारण करके

भगवान शिव तांडव भी करते हैं।


आलोक-

चेतना की अवस्थाएं- 

(जागृत, निंद्रा व स्वप्न)


✒️मनोज श्रीवास्तव

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