जीवन में हरियाली
हरियाली तीज विशेष
जीवन में हरियाली
@मानव
धार्मिक अनुष्ठान के साथ ही
सामाजिक,साँस्कृतिक
और प्राकृतिक सरोकारों से जुड़ा
हरियाली तीज पर्व
भारतीय सँस्कृति की
गहराइयों को दर्शाता है।
यह पर्व श्रावण मास की
रिमझिम फुहारों,हरियाली
और सौंदर्य को भी
मनाने का अवसर देता है।
यह पर्व प्रेम,भक्ति
और समर्पण की ओर
इंगित करता है
और प्रकृति
व पारिवारिक मूल्यों के प्रति
सम्मान को भी
उजागर करता है।
जब धरती वर्षा ऋतु के कारण
हरी चुनरी ओढ़ लेती है
मौसम पेड़ों पर झूले डालने,
मेंहदी रचाने
और हरियाली से
आनंदित होने का होता है
तो आकर्षक
व सुंदर वस्त्रों वाली महिलाएँ
समृद्धि और सौभाग्य का
प्रतीक बन जाती हैं।
माता पार्वती ने कठोर तप कर
शिव जी को पति रूप में पाया;
माता-पार्वती और भगवान शिव के
दिव्य मिलन से जुड़ा
हरियाली तीज का व्रत
उसी तपस्या
और समर्पण का प्रतीक है।
हरियाली तीज नारी-सँवेदना
और सामाजिकता का प्रतीक है,
जहाँ सास-बहू,माँ-पुत्री
और सखियों के बीच
प्रेम गहरा हो जाता है।
हरियाली तीज का पर्व
प्रकृति,प्रेम,नारी सशक्तीकरण
और श्रेष्ठ पारिवारिक मूल्यों का
समन्वय है,
जहाँ सच्चा प्रेम
केवल पाने में नहीं,
बल्कि साथी के प्रति
समर्पण में है
जीवन की हरीतिमा पाने के लिए,
शिव-पार्वती जैसी श्रद्धा,
व आस्था के साथ
सँबंधों की मिठास आवश्यक है।
✍️मनोज श्रीवास्तव

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