राष्ट्रवाद का श्रीगणेश
गणेशोत्सव
राष्ट्रवाद का श्रीगणेश
@मानव
गणपति गणों के स्वामी हैं,
व्रातपति हैं,
समूह के देवता हैं,
इसलिए समूह से प्यार करते है।
वे व्यक्ति की अपेक्षा
समूह की गतिविधियों में
रुचि लेते हैं;
इसी कारण वे
सच्चे लोकदेवता हैं।
गणेश जी ज्ञान और विवेक,
बल-बुद्धि, ऋत
और सत्य के देवता हैं;
एक वही हैं,जो युवाओं के
विशिष्ट नायक होने के कारण ही
विनायक कहे जाते हैं।
दक्षिण भारत में गणेश जी
श्रम के देवता माने गए;
विश्वास है कि
श्रम करने वालों की पीठ पर
गणेश जी अपना हाथ रखते हैं।
गाणपत्य सँप्रदाय वाले
श्रम की पूँजी को ही
धर्म की पूँजी घोषित करते हैं;
उनकी मान्यता है
कि श्रम करने वालों के लिए
गणेश जी भविष्य के द्वार
स्वतः खोल देते हैं।
गणेश जी
उस संगठित समाज के सूत्रधार हैं,
जो जातिभेद,लिंगभेद, वर्गभेद
और वर्ण व्यवस्था से ऊपर है।
तभी तो गणपति
समान शुभ-समान लाभ का विचार
फैलाने के कारण
सबके आराध्य हैं।
उनका पेट बहुत बड़ा है,
इसलिए वे सब छोटी-मोटी बातें
पचा जाते हैं;
कान सूप की तरह इसलिए हैं,
क्योंकि वे सार-सार को
ग्रहण करते हैं
और थोथी बातों को
हवा में उड़ा देते हैं।
उनके हाथों में पाश
और अंकुश शोभा के लिए नहीं,
उन दुर्जनों के लिए है,
जो समाज की तोड़-फोड़ में
सँलग्न रहते हैं।
युवाओं के सँगठन के लिए
गणपति बप्पा से बड़ा कोई पुरोधा
तिलक जी को नहीं मिला;
भारतीय युवाओं में
जो साँस्कृतिक चेतना
सुप्त पड़ी थी,
उसे जाग्रत करने के उद्देश्य से
गणपति को महान आदर्श के रूप में
राष्ट्रीय स्वाभिमान की जागृति के लिए
सार्वजनिक गणेशोत्सव की
नींव रखी गई।
जैसे-जैसे इस उत्सव की धूम
महाराष्ट्र से पूरे भारत में फैलती गई,
वैसे-वैसे युवाओं में
राष्ट्रवाद की भावना
मजबूत होती गई।
राष्ट्र के विकास का आधार
मनुष्य के श्रम की पूँजी ही है,
इसीलिए तिलक ने गणेश जी को
राष्ट्र का आराध्य बनाया।
विघ्नहर्ता गणेश जी
उन सभी को सुहाते है
जो कर्म में जुते हुए हैं
और अपने मानस में श्रद्धा
और विश्वास को स्थापित कर
निर्भय हो जाना चाहते हैं।
युवा-चेतना में ओज
और उल्लास की तरंगें
सहज ही हिलोरें लेती हैं।
वह उत्सवधर्मी भी होती है
और अपने युग को
अलंकृत करते रहने की
इच्छा से भी भरी होती हैं।
एक यही उत्सव है,
जो एक साथ लोक पर्व है,
साँस्कृतिक
और सामाजिक सम्मेलन है,
सँगठन का अवसर है।
जो सत्य के आग्रही हैं
उनके लिए गणपति से अच्छा
शुभंकर कोई हो भी नहीं सकता।
क्योंकि वे मङ्गलकर्ता हैं।
✍️मनोज श्रीवास्तव

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