देश की ताकत हिंदी

 राजभाषा दिवस पर

देश की ताकत हिंदी


             @मानव

भाषा हमारी अभिव्यक्ति का 

न केवल सबसे समर्थ माध्यम है

बल्कि सँस्कृति के 

निर्माण,सँरक्षण,सँचार

और अगली पीढ़ी तक 

उसका हस्तांतरण भी

उसी पर टिका होता है;

भाषा सँस्कृति की 

वासस्थली जो ठहरी।


सँवाद संप्रेषण का

सशक्त माध्यम है;

मनुष्य को इसलिए भी 

परमात्मा की श्रेष्ठ कृति 

कहा जाता है

कि वह भाषा का उपयोग कर

अपने भावों को

अभिव्यक्त करने में सक्षम है।


ज्ञान के साथ भी भाषा का रिश्ता

गहन और व्यापक है

क्योंकि भाषा में ही

ज्ञान सँजोया जाता है।


भाषा की बदौलत मनुष्य 

अपने देश-काल की 

सीमाओं से परे जा कर

नया सृजन भी कर पाता है। 


वस्तुतः भाषा मनुष्य की 

एक विलक्षण रचना,

और एक ऐसी कृति है

जो नश्वर मनुष्य के आविष्कार

और अभ्यास पर टिकी होकर भी

अत्यंत शक्तिशाली है। 


दुनिया क्या है

और उस दुनिया में हम

क्या कुछ कर सकते हैं

यह सब भाषा की ही देन है। 


भाषा से हम अपनी दुनिया को

देखते-समझते हैं,

उसी से वस्तुओं को पहचानते हैं,

पारस्परिक सँवाद करते हैं, 

प्रार्थना करते हैं

और प्रेम का 

प्रकटीकरण करते हैं।


भाषा के ही सहारे 

कुण्ठा-आक्रोश

तथा हास-परिहास सहित 

विभिन्न भावनाओं को भी

हम मूर्त आकार देते हैं।


वस्तुतः भाषा हमारे अस्तित्व का

प्रमाण और साक्षी बन कर 

हमारी सत्ता का प्रसार

तय करती है।


यही विशेषता है,

जो मनुष्य को अन्य प्राणियों से

भिन्न करती है;

हिन्दी बहुआयामी भाषा है;

यह बात इसके प्रयोग क्षेत्र के

विस्तार से समझी जा सकती है।


भाषाओं की दुनिया 

बहुरंगी है;

हिंदी हमारे मन

और मिट्टी की भाषा है;

कोई इससे दूर नहीं रह सकता।


हिन्दी और भारतीय भाषाओं को

ऐसे युवाओं का इंतजार है,

जो अपनी भारतीयता को 

उसकी भाषा,उसकी परंपरा, 

उसकी सँस्कृति के साथ 

समग्रता में स्वीकार करें। 


जिनके लिए परंपरा

और सँस्कृति एक बोझ नहीं,

बल्कि गौरव का कारण है;

उनके लिए विश्व पटल पर हिंदी

एक दिन जरूर राज करेगी।


ये लोग ही हमें भरोसा जगा रहे हैं;

भारत को भी जगा रहे हैं;

भरोसा जगाते ऐसे दृश्य हैं,

जिनके श्रीमुख और कलम से

व्यक्त होती हिन्दी

देश की ताकत है।


✍️मनोज श्रीवास्तव

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