सपनों के वाहक
दुर्गा पूजा पण्डाल
सपनों के वाहक
@मानव
दुर्गापूजा पण्डाल
अपनी अद्वितीय थीम
व अद्भुत निर्माण कला से
जनजीवन में आनंद का
नवसंचार ही नहीं करते,
बल्कि मानस पटल पर
सामाजिक उत्तरदायित्व,
समावेशिता
व जागरूकता की
अमिट छाप छोड़ते हैं।
ये लोगों को हँसाते हैं,
रुलाते हैं,
भावनाओं में बहाते हैं,
देश-दुनिया का
हाल-हकीकत बताते हैं,
सपनों की दुनिया में ले जाते हैं,
सुनहरे भविष्य की आस जगाते हैं,
समृद्ध कला संस्कृति
व उसकी वर्तमान स्थिति से
अवगत कराते हैं।
ये महाकाल से
बुर्ज खलीफा,ह्वाइट हाउस तक की
सैर भी कराते हैं;
दुनियाभर में गहरा रहे
संकटों को लेकर
सावधान करते हैं।
पण्डाल के विषय
अधिकारों का एहसास कराते हैं
और अन्याय के विरुद्ध
आवाज उठाना भी सिखाते हैं।
पण्डाल के हर रङ्ग
खुद में एक भावना समेटे हैं;
इनमें प्रेम की गरमाहट है,
विरोध की आग है,
दृढ़ विश्वास और साहस है
और आशा की चमक भी है;
क्योंकि रङ्ग जीवन की धड़कन हैं।
रङ्गों में निहित भावनाओं को
पण्डाल रूपी कैनवस में उकेर कर
न केवल देवी दुर्गा के स्वरूप
बल्कि हमारे सोच को भी
आकार मिलता है।
पण्डाल के रङ्ग
बहुआयामी प्रकृति को दर्शाते हैं;
जो न केवल दृश्यात्मक आनंद
बल्कि आत्म-अभिव्यक्ति की
गहन भाषा के रूप में
प्रस्तुत होते हैं;
वस्तुतः पण्डाल
केवल कलात्मक रचना नहीं
बल्कि सामाजिक चेतना का
असाधारण प्रतिबिम्ब हैं।
✍️मनोज श्रीवास्तव

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