माटी का दिया
दीपावली पर,
माटी का दिया
@मानव
मिट्टी के दीये का
अपना सौंदर्य है;
वह भले ही छोटा हो,
पर उसका प्रकाश
सबसे कोमल
और सबसे सच्चा होता है।
उसमें मनुष्य का परिश्रम है,
धरती की गंध है
और आस्था की गर्मी है;
वह दीप जब जलता है,
तब लगता है
जैसे किसी किसान की हथेली,
किसी माँ के नेत्र,
किसी बच्चे की हँसी-
सब मिलकर उस लौ को
थरथरा रहे हों।
यही मिट्टी का दीया
जीवन की सबसे गहरी
प्रतीक-कथा कहता है
कि जो झुकता है,
वही जलता है,
जो मिटता है,
वही प्रकाशित होता है।
✍️मनोज श्रीवास्तव

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