दीपावली का सन्देश

 दीपावली पर,


दीपावली का सन्देश

             @मानव

दीपावली केवल एक पर्व नहीं,

बल्कि भारतीय आत्मा का 

आलोकित उत्सव है, 

अँधकार से सँवाद करने की कला है

और निराशा के बीच आशा का

दीप जलाने का नाम है।


दीपावली का उत्सव 

केवल लक्ष्मी की आराधना नहीं है,

बल्कि श्रम और सौंदर्य, 

करुणा और स्मृति,

उत्सव और साधना का सँगम है।


इस दिन हर व्यक्ति,

चाहे गरीब हो या अमीर, 

कुछ न कुछ सजाता है-

अपना घर,अपना मन

या अपनी आशा।


यह सजावट

केवल भौतिक नहीं, 

मनोवैज्ञानिक भी है;

यह सजाने,सँवारने,

सँजोने का उत्सव है

जैसे हम अपने भीतर के 

अस्त-व्यस्त भावों को भी 

दीपों की पंक्तियों में सजा दें।


जो दीप जलता है,

वह बुझता नहीं,

वह हृदय में उतर जाता है।

दीपावली का गहनतम अर्थ यही है

भीतर का दीप जलाना।


यह भीतर का दीप

तब तक नहीं जलता,

जब तक हम अहंकार की 

कालिख न मिटा दें,

ईर्ष्या का धुआँ न हटाएँ

और स्वार्थ की ठंडी राख को 

न झाड़ दें।


जब भीतर की सफाई हो जाती है,

तब हर मन स्वयं

दीप बन जाता है,

जैसे हर घर में नहीं,

हर आत्मा में दीपावली 

मनाई जा रही हो;

वहाँ कोई शोर नहीं,

कोई आतिशबाजी नहीं-

सिर्फ एक धीमी,निर्मल, 

आत्मीय रोशनी।


वही सच्ची दीपावली है

जो संसार को नहीं,

आत्मा को आलोकित करती है;

उसी क्षण मनुष्य

देवत्व को छू लेता है। 


दीपावली केवल परंपरा नहीं,

अस्तित्व की निरंतरता का 

प्रतीक है;

हर युग में,

हर परिस्थिति में,

जब भी अंधकार गहराता है, 

मनुष्य अपने भीतर से 

दीपावली खोज लेता है

कभी प्रेम के रूप में,

कभी कला के,

कभी करुणा के

और कभी कविता के, 

क्योंकि अंततः मनुष्य का 

अर्थ ही प्रकाश है

और दीपावली उसी अर्थ की 

पुनर्स्मृति।


 ✍️मनोज श्रीवास्तव

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