दीपावली की प्रतीकात्मकता

 दीपावली पर,


दीपावली की प्रतीकात्मकता

                 @मानव

दीपावली किसी के लिए 

सम्पन्नता का प्रतीक है,

किसी के लिए मिलन का 

और किसी के लिए स्मृति का।


बूढ़ी माँ जब पुराने दीए साफ करती है

तो हर दीए में उसे बीते वर्षों की

परछाई दिखती है;

अब वह दीया जलाती है

तो उसमें एक तरह की

मौन प्रार्थना होती है

कि उजाला केवल घर का न हो,

मन का भी हो। 


साहित्य में दीपावली

केवल एक दृश्य नहीं,

एक प्रतीक  है-प्रकाश का, 

ज्ञान का,

सत्य का।


किसी ने इसे राम के 

अयोध्या लौटने का

उत्सव कहा

किसी ने आत्मा की

विजय का,

किसी ने प्रेम के पुनर्जन्म का,

पर सबका सार एक ही रहा-

अँधकार से प्रकाश की ओर, 

भय से विश्वास की ओर, 

बाह्य से अँतर की ओर यात्रा।


सँस्कृति के स्तर पर 

दीपावली हमें यह सिखाती है

कि उत्सव केवल प्रदर्शन नहीं,

सँवेदना है।


यह पर्व हमें जोड़ता है-

परिवारों से,

पड़ोसियों से

और यहाँ तक कि 

अजनबियों से भी।


किसी और के द्वार

एक दीप रख देना,

यह बताना है कि हम साथ हैं,

हम एक ही प्रकाश में जी रहे हैं;

यही भारतीयता का हृदय है-

'तमसो मा ज्योतिर्गमय।' 


जब रात गहराती है

और दीप धीरे-धीरे बुझने लगते हैं, 

तब भी उनकी लौ की छाया 

दीवारों पर बनी रहती है;

वह छाया एक स्मृति बन जाती है

कि उजाला क्षणभंगुर है,

पर उसका प्रभाव अनंत।


 ✍️मनोज श्रीवास्तव

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