गुरु तत्त्व की विराट परिभाषा
जन्माष्टमी पर, गुरु तत्त्व की विराट परिभाषा @मानव श्रीकृष्ण एक ओर माखन चुराते नटखट कान्हा का बालरूप हैं, जो जीवन में सहजता,आनंद और सरलता भर देता है तो दूसरी ओर कुरुक्षेत्र के रण में खड़े योगेश्वर श्रीकृष्ण हैं, जिनके मुख से निकली श्रीमद्भगवद्गीता आज भी मानवता के लिए जीवन का सर्वोच्च पाठ है। श्रीकृष्ण ने अर्जुन को युद्ध करना नहीं सिखाया, बल्कि परिस्थितियों से भागने के बजाय अपने कर्तव्य को पहचानना सिखाया; उन्होंने बताया कि कर्म हमारे हाथ में होते हैं, परिणाम नहीं। उन्होंने संशय में डूबे शिष्य को आत्मविश्वास दिया, मोह में उलझे मन को विवेक दिया और निराशा के उस क्षण में कर्तव्य का दीप जलाया; यही वजह है कि 'कृष्णं वन्दे जगद्गुरुम्' केवल एक स्तुति नहीं, गुरु तत्व की विराट परिभाषा है। श्रीकृष्ण हमें स्मरण कराते हैं कि शिक्षा का अर्थ केवल जानना नहीं, बल्कि सही समय पर सही निर्णय लेने की क्षमता विकसित करना है। भगवान से संबंध की स्थापना भागवत है। श्रीकृष्ण का विश्वरूप...