राष्ट्रीय एकता वाहक शिव
राष्ट्रीय एकता वाहक शिव
@मानव
जिसमें सारा जगत शयन करता है,
जो विकार रहित है,
वह शिव हैं;
जो अमंगल का ह्रास करते हैं,
वे ही सुखमय,
मंगलमय शिव हैं।
जो सारे जगत को
अपने अंदर लीन कर लेते हैं,
वे ही करुणासागर
भगवान शिव हैं;
जो नित्य,सत्य,जगत आधार,
विकार रहित,
साक्षीस्वरूप हैं,
वे ही शिव हैं।
धर्मग्रंथों में भगवान शिव को
'कालों का काल'
और 'देवों का देव'
अर्थात् 'महादेव' कहा गया है।
एक होते हुए भी शिव के
नटराज,
पशुपति,
हरिहर,
त्रिमूर्ति,
मृत्युंजय,
अर्द्धनारीश्वर,
महाकाल,
भोलेनाथ,
विश्वनाथ,
ओंकार,
शिवलिंग,
बटुक,
क्षेत्रपाल,
शरभ इत्यादि अनेक रूप हैं।
महासमुद्र रूपी शिव ही
एक अखण्ड परम तत्व हैं,
इन्हीं की अनेक विभूतियाँ
अनेक नामों से पूजी जाती हैं,
यही सर्वव्यापक
और सर्वशक्तिमान हैं।
यही व्यक्त-अव्यक्त रूप से
'सगुण ईश्वर'
और 'निर्गुण ब्रह्म' कहे जाते हैं
तथा यही परमात्मा,
जगत आत्मा,
शम्भव,
मयोभव,
शंकर,
मयस्कर,
शिव,
रूद्र आदि कई नामों से
संबोधित किए जाते हैं।
शिव के मस्तक पर
अर्द्धचंद्र शोभायमान है,
समुद्र मंथन से उद्भूत
विष और अमृत कलश से
भगवान शिव ने विषपान कर
सृष्टि को नया जीवनदान दिया
जबकि अमृत का पान
चन्द्रमा ने कर लिया;
विषपान से नीले कंठ के कारण
वे 'नीलकंठ' कहलाए।
विष के भीषण ताप के
निवारण के लिए
उन्होंने चन्द्रमा की एक कला को
अपने मस्तक पर धारण कर लिया;
यही शिव का तीसरा नेत्र है
और इसी कारण भगवान शिव
'चन्द्रशेखर' भी कहलाए।
त्रिलोक सुन्दरी
और शीलवती गौरी को
अर्धांगिनी बनाने वाले शिव
प्रेतों और भूत-पिशाचों से घिरे रहते हैं।
उनका शरीर भस्म से लिपटा रहता है,
गले में सर्पों का हार शोभायमान है,
कंठ में विष है,
जटाओं में जगत तारिणी गंगा मैया हैं
और माथे में प्रलयंकर ज्वाला है।
नंदी शिव का वाहन है
जिसके अमंगल रूप होने पर भी
शिव अपने भक्तों को मंगल,श्री
और सुख-समृद्धि प्रदान करते हैं।
महाशिवरात्रि को भगवान शिव का
सबसे पवित्र दिन है,
जो सकारात्मक ऊर्जा का स्रोत भी है,
यह आध्यात्मिक चरम पर
पहुँचने का सुअवसर है।
महाशिवरात्रि को
शिवतत्व को आत्मसात करने,
नकारात्मक ऊर्जाओं को
समाप्त करने
और आध्यात्मिक उत्थान
प्राप्त करने का
सर्वोत्तम अवसर माना जाता है।
देवाधिदेव भगवान शिव के
समस्त भारत में जितने मंदिर
अथवा तीर्थस्थान हैं,
उतने अन्य किसी देवी-देवता के नहीं;
कोई गाँव उनसे अछूता नहीं
अतः वे भारत की भावनात्मक
एवं राष्ट्रीय एकता
तथा अखण्डता के प्रतीक हैं।
✒️मनोज श्रीवास्तव

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