स्वागत नववर्ष का

 स्वागत नववर्ष का 


                @मानव

केवल कैलेंडर का

पन्ना बदलना नहीं,

अपितु जीवन के कालचक्र में

खड़े होकर स्वयं से

प्रश्न करने का अवसर है

नया साल।


जिस क्षण पुराने वर्ष को 

हम अलविदा कहते हैं

और नए वर्ष का स्वागत करते हैं,

उसी क्षण जीवन के दो पहिए

अलविदा और अगवानी, 

एक साथ घूमते दिखते हैं। 


एक पहिया पीछे छूटते 

अनुभवों,सफलताओं

और विफलताओं का है,

तो दूसरा आगे खुलते 

अवसरों,आशाओं

और सँभावनाओं का।


इन्हीं दोनों के मध्य

खड़ा मनुष्य तय करता है

कि उसे आगे

किस दिशा में जाना है।


अलविदा कहना

बीते समय से विदा लेना ही नहीं,

बल्कि उन आदतों,विचारों 

और प्रवृत्तियों से विदाई भी है

जो हमारे जीवन को

बोझिल बनाती रही हैं।


हमें अलविदा कहना होगा 

नकारात्मकता को,

निराशा को,

आलस्य को,

द्वेष और असहिष्णुता को। 


उस अहंकार को भी 

अलविदा कहना होगा,

जो हमें दूसरों से दूर करता है 

और उस भय को भी,

जो हमें आगे बढ़ने से रोकता है।


अलविदा उन शिकायतों को,

जो हम बार-बार दोहराते हैं, 

पर समाधान की ओर

कदम नहीं बढ़ाते।


अगवानी का अर्थ भी

केवल शुभकामनाएं देना नहीं है,

बल्कि नए मूल्यों

और नवसंकल्पों का

स्वागत करना है।


नए साल की अगवानी

हम आशा,विश्वास

और साहस से करें।

इसमें करुणा,सँवेदना

और सह-अस्तित्व की 

अगवानी हो,

ताकि हमारा जीवन 

राष्ट्र-समाज के लिए भी 

उपयोगी बने।


सत्य, ईमानदारी

और अनुशासन की अगवानी हो,

ताकि हमारे कर्म

और विचारों में सुसंगित हो। 


जब पुराने वर्ष की सीख संजोकर,

उनसे सबक लेकर

हम आगे बढ़ते हैं,

तभी नया साल

वास्तव में सार्थक बनता है। 


यदि हम सही मूल्यों के साथ 

नए साल की अगवानी करें 

और साहस के साथ 

गलतियों को अलविदा कहें, 

तो नया साल सफलता का 

निमित्त बन सकता है।


 ✒️मनोज श्रीवास्तव

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