ऊष्मा व ऊर्जा वाहक पर्व
लोहड़ी पर्व पर,
ऊष्मा व ऊर्जा वाहक पर्व
@मानव
ऊर्जा और ऊष्मा की
वाहक है-अग्नि;
इसे केंद्र में रखकर
लोहड़ी मनाई जाती है,
जो परिवारिक संबंधों में
ऊष्मा का संचार करती है।
ऊष्णता व ऊर्जा का
सँचार करने वाला
यह वह पर्व है
जो भारतीय समाज
एवं परिवार को शक्ति भी देता है
और भविष्य के प्रति
आस्थावान भी बनाता है।
बच्चे के जन्म के समय
पहले वर्ष में उसकी आमद को
लोहड़ी की पवित्रता से जोड़ कर
अनेक शुभ कार्य होते हैं
जिनकी साक्षी होती है अग्नि।
अग्नि धरती का श्रृंगार है;
अग्नि के बिना
शक्ति और भक्ति के
सँकल्पों की सिद्धि नहीं होती।
ऋग्वेद के अग्नि सूत्र से
पँजाब की पावन धरा पर
ऋषियों ने अग्नि पूजा का
विशाल सिद्धांत रखा था।
पर्यावरण के प्रति
पँजाब का यह संदेश
आज विश्व को दिशा देता है;
लोहड़ी इसी का अटूट हिस्सा है;
पँजाब के विलक्षण पर्व
लोहड़ी का पँजाबी
वर्ष भर इंतजार करते हैं।
पँजाब में बच्चियों की लोहड़ी ने
लिंग भेद समाप्त कर दिया है;
पँजाब के प्रत्येक गाँव में
धीयाँ दी लोहड़ी पर्व मना कर
पँजाबी अपने प्रगतिशील सोच का
प्राकट्य करते है।
दुल्ला भट्टी का प्रसंग
पँजाब के वीर नायकों की
परंपरा को इस दिन
पुनर्जीवित करता है;
लोहड़ी के समय ऐसे
नायकों को याद करना
पँजाब की वीर परंपरा के आगे
नतमस्तक होना है।
पुरातन पँजाब में अग्नि को
सँभाल कर रखा जाता था;
पँजाबी घरों में अग्नि को
कभी बुझाया नहीं जाता था;
लोहड़ी के दिन इसी अग्नि के
पुन: पावन रूप की
पूजा होती थी।
लोहड़ी
सामाजिक संबंधों का पर्व है;
जो परिवारों में खुशहाली
महसूस करने की
ऐसी संवेदना है
जिसका सकारात्मक प्रभाव
वर्ष भर रहता है।
लोहड़ी पर ऋतु परिवर्तन से
जनमानस में नई ऊर्जा का
सँचार होता है
और पूरा पंजाब बदलती हुई
इस सँवेदना का सँघर्ष
जीने की इच्छा में रूपांतरण कर
राष्ट्र के प्रति समर्पित होता है।
आलोक-
दुल्ला पँजाब का वीर नायक था।अकबर के समय में वह जालिम अमीरों को लूटता था और गरीब बच्चियों की शादी में बेबाक होकर वह धन देता था।अकबर जिन वीर नायकों से डरता था,उसमें दुल्ला प्रथम पंक्ति में आता था।वह भट्टी जाति का राजपूत था।
✒️मनोज श्रीवास्तव

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