विषपायी
विषपायी
@मानव
समुद्र मंथन से निकले
हलाहल विष को
भयाक्रांत सृष्टि की
रक्षणार्थ
स्वयं कण्ठ में
धारण करने का प्रसंग
हमें बताता है
कि शिवत्व का वास्तविक अर्थ
केवल भगवान शिव की
पूजा करना नहीं,
बल्कि दूसरों के दुख को
कम करने,
समाज के कल्याण
और धर्म की रक्षा के लिए
त्याग,सेवा
और लोककल्याण की भावना
धारण करना है।
तभी तो हलाहल पान करके
शिव ने हमें सिखाया है
परम् त्याग!
अमृत का पान सभी चाहते हैं,
लेकिन जनकल्याण के लिए
भगवान विष पीते हैं;
यही कारण है कि शिव की पूजा
देव, दैत्य व मनुष्य तीनों करते हैं।
✒️मनोज श्रीवास्तव
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