राखी की डोर
राखी की डोर
@मानव
बारिश की बूँदों की
रुनझुन के बीच
आता है रक्षाबंधन!
साधारण से राखी के धागे में
भाई-बहन के प्रेम,विश्वास
और भावनाओं की
पूरी दुनिया
समाई होती है।
रक्षाबंधन भाई-बहन के प्रति
प्रेम,विश्वास
और दायित्व का बंधन है;
राखी का सूत्र होने से पहले,
यह आत्माओं के बीच
एक स्नेहसिक्त बंधन का
पावन प्रतीक है।
आधुनिकता की
आँधी के बावजूद
कम नहीं हुआ है
भाई-बहन के बीच स्नेह!
एक ऐसा रिश्ता
जिसकी घनी छाँव में
सदा बैठा होता है बचपन!
समय बदलता है,
दायित्व बढ़ते हैं,
परिस्थितियां बदल जाती हैं,
लेकिन बचपन का अपनत्व
सदा रहता है।
किसी रीति-रिवाज के कारण
हमारे सँबंध नहीं,
बल्कि एक-दूसरे को आवश्यक
समय,ध्यान और ऊर्जा देने से
प्रगाढ़ बनते हैं।
इसलिए राखी केवल त्योहार नहीं,
बल्कि पुरानी स्मृतियों को
फिर से जी लेने का
अवसर भी है।
यहाँ रक्षा का अर्थ
केवल शरीर की रक्षा ही नहीं,
बल्कि एक-दूसरे के सम्मान,
सपनों,आत्मविश्वास
और गरिमा की रक्षा करना भी है।
हमें केवल शरीर की नहीं,
बल्कि एक-दूसरे के सम्मान,
सपनों,आत्मविश्वास
और गरिमा की भी रक्षा करनी है।
यही राखी के धागे का
वास्तविक अर्थ है।
राखी का धागा
हमें अपने भीतर भी
एक शुभ सँकल्प
बाँधने की प्रेरणा देता है
कि हम सँबंधों में
अहंकार के स्थान पर प्रेम,
शिकायत के स्थान पर सँवाद
और स्वार्थ के स्थान पर
सहयोग को स्थान दें।
रक्षाबंधन आपसी सँबंधों में
स्नेह और समरसता के मूल्यों का
ऐसा उत्सव है,
जो मानवीय जुड़ाव को
प्रोत्साहित करता है।
राखी कुछ दिनों तक
कलाई पर रह सकती है,
पर सँवेदनशीलता के साथ
दिया गया हमारा ध्यान,
स्वीकृति और स्नेह का धागा
हमारे सँबंधों को
जीवन भर के लिए
मजबूत कर सकता है।
माथे पर लगाया गया तिलक
हमें याद दिलाता है
कि हम सभी चैतन्य ऊर्जा हैं,
यात्रा पर निकली आत्मा हैं,
जो कई जन्मों के
भावनात्मक अनुभवों
व कर्म सँबंधों को
लेकर चल रहा है।
✒️मनोज श्रीवास्तव

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